वंश नहीं, संस्कारों की परंपरा आगे बढ़ाइए, तभी पीढ़ियां याद रखेंगी : स्वस्तिभूषण माताजी
वंश नहीं, संस्कारों की परंपरा आगे बढ़ाइए, तभी पीढ़ियां याद रखेंगी : स्वस्तिभूषण माताजी केशवरायपाटन। संतान और वंश को आगे बढ़ाना ही मनुष्य के जीवन की वास्तविक पहचान नहीं है। व्यक्ति की सच्ची पहचान उसके उन सत्कर्मों, विचारों और संस्कारों से बनती है, जो उसके जीवन के बाद भी समाज और आने वाली पीढ़ियों […]
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