आत्मज्ञान होने पर दुख भी सुख जैसा अनुभूत होने लगता है, प्रतिकूल परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही सच्चा सुख है” : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर*
*”आत्मज्ञान होने पर दुख भी सुख जैसा अनुभूत होने लगता है, प्रतिकूल परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही सच्चा सुख है” : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर* *9 नवंबर को भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव पर निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा* कुण्डलपुर(दमोह)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने आत्मज्ञान, निर्विकल्पता, कर्म सिद्धांत और समता […]
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