त्रयी वैयावृत्ति धारी आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
त्रयी वैयावृत्ति धारी आचार्य श्री विद्यासागर महाराज _________________8जून, 2002, श्री सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर, देवास, म.प्र. का प्रसंग है। संघस्थ मुनिश्री108 कुंथुसागरजी महाराज को पैर में हरपीज रोग हो गया। जिसमें वेदना अकथ होती है। 8जून को सायं पाँच बजे जब वेदना असह्य हो गई, तब उनकी आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे।और आँखों को बंद किए […]
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