राग द्वेष मोह कर्म बंधन से मुक्त होकर शुद्ध स्वरूप में स्थित होना परमात्म पद है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी    सीकर 

धर्म

राग द्वेष मोह कर्म बंधन से मुक्त होकर शुद्ध स्वरूप में स्थित होना परमात्म पद है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर

आचार्य श्री संघ सहित दंग की नसिया विराजित है आचार्य श्री 108वर्धमान सागर जी द्वारा वात्सल्य बाल प्रतिभा संस्कार महोत्सव में सभी उम्र के बच्चों, बालकों को जैन संस्कार आरोपित किए जाएंगे। 4 अक्टूबर को जैन भवन से बालक बालिकाओं की शोभायात्रा दंग की नसिया आवेगी जहां पर ध्वजारोहण ,मंगलाचरण एवं धार्मिक कार्यक्रम प्रातःकालीन एवं दोपहर के सत्र में जिसमें आचार्य श्री का उपदेश भी होगा।इस कार्यक्रम में टोंक ,निवाई सीकर सहित अनेक जैन पाठ शाला के बालक बालिका सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेंगे।

 

 

दोपहर को परमात्म प्रकाश ग्रन्थ के स्वाध्याय में आचार्य श्री ने बताया कि आत्मा की पहचान ही सच्चे धर्म का आधार हैं परमात्मप्रकाश में आत्मा के स्वरूप को बहुत सुंदर ढंग से समझाया गया है। मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि वह देह को ही अपना स्वरूप मान बैठता है। शरीर, धन, परिवार, पद और संसार की वस्तुओं को अपना मानकर उनमें ममत्व करता है, जबकि वास्तविकता में ये सभी आत्मा से भिन्न हैं। शास्त्र में आत्मा के तीन भेद बताए गए हैं—बहिरात्मा, अंतरात्मा और परमात्मा। जो जीव शरीर और बाहरी पदार्थों को ही अपना मानता है तथा आत्मा के वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचानता, वह बहिरात्मा है। उसका उपयोग और दृष्टि बाहरी पदार्थों में ही लगी रहती है। इसलिए वह संसार में सुख खोजता है, लेकिन उसे स्थायी शांति प्राप्त नहीं होती। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि जब जीव यह समझने लगता है कि मैं शरीर नहीं हूँ, मैं शरीर से भिन्न ज्ञानमय आत्मा हूँ, तब उसके भीतर आत्म-जागृति प्रारंभ होती है। यही अंतरात्मा की अवस्था है। अंतरात्मा बाहरी पदार्थों से ममत्व कम करके अपने भीतर स्थित चेतन तत्व को पहचानने का प्रयास करती है। वह समझती है कि संसार की वस्तुएँ परिवर्तनशील हैं, लेकिन आत्मा का वास्तविक स्वरूप ज्ञान और दर्शनमय है। और जब यही आत्मा समस्त राग-द्वेष, मोह और कर्मबंधन से पूर्णतः मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित हो जाती है, तब वह परमात्मा कहलाती है। परमात्मा कोई बाहर से आने वाली वस्तु नहीं है; प्रत्येक जीव के भीतर वही शुद्ध आत्मस्वरूप विद्यमानहैं। 4 अक्टूबर को पूर्व में आयोजित प्रतियोगिता में चयनित विजेताओं को भी पुरस्कृत किया जावेगा।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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