क्षमा से मन निर्मल, रिश्तों में आती है मधुरता : जम्बू जैन सर्राफ

धर्म

क्षमा से मन निर्मल, रिश्तों में आती है मधुरता : जम्बू जैन सर्राफ

 

क्षमावाणी पर्व आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पावन अवसर, वैर-विरोध मिटाकर प्रेम और सद्भाव अपनाने का आह्वान

कोटा।

क्षमावाणी पर्व केवल क्षमा मांगने और क्षमा करने का अवसर नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन में झांककर आत्ममंथन करने और जीवन को अधिक निर्मल बनाने का पावन पर्व है। क्षमा मन के बोझ को हल्का करती है, अहंकार को दूर करती है और रिश्तों में प्रेम एवं मधुरता का संचार करती है।

 

श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, दादाबाड़ी के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने कहा कि जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों की भूलों को हृदय से क्षमा कर देना ही क्षमावाणी पर्व की वास्तविक सार्थकता है। क्षमा से मन निर्मल होता है, भीतर का द्वेष समाप्त होता है और आपसी संबंधों में नई मिठास आती है।

 

उन्होंने कहा कि उत्तम क्षमा को केवल पर्व विशेष तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन का संस्कार बनाना चाहिए। जब व्यक्ति अपने मन से अहंकार, वैर-विरोध और द्वेष को निकाल देता है, तब जीवन में शांति और आत्मिक प्रसन्नता का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

जम्बू जैन सर्राफ ने समाज के सभी लोगों से आह्वान किया कि क्षमावाणी पर्व पर मन में किसी के प्रति कोई शिकायत, कटुता या वैरभाव न रखें। एक-दूसरे से क्षमा मांगें, हृदय से क्षमा करें और प्रेम, करुणा तथा सद्भाव के साथ जीवन जीने का संकल्प लें। यही क्षमावाणी पर्व का वास्तविक संदेश और आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ केवल शब्द नहीं, मैत्री का संकल्प : अर्चना जैन

 

सुधासागर बालिका छात्रावास की अध्यक्ष अर्चना जैन ने कहा कि क्षमावाणी पर्व आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पावन अवसर है। वर्षभर में हमारे मन, वचन अथवा कर्म से जाने-अनजाने किसी को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए हम हृदय से क्षमा प्रार्थी हैं।

 

उन्होंने कहा कि ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ केवल क्षमा मांगने के शब्द नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, मैत्री और सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने, गलतियों को स्वीकार करने और संबंधों में आई दूरियों को प्रेम से मिटाने की प्रेरणा देता है।

अर्चना जैन ने कहा कि आइए, इस पावन अवसर पर मन के सभी वैर-विरोध और कटुता को दूर कर क्षमा, करुणा और मानवता को अपने जीवन का आधार बनाएं। जब मन में क्षमा का भाव जागता है, तो परिवार, समाज और रिश्तों में सौहार्द की नई रोशनी फैलती है। यही क्षमावाणी पर्व की सच्ची भावना है।

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी की रिपोर्ट

मो. 9929747312

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