सेवा ही सच्चे धर्म का स्वरूप, मानव सेवा और जीवदया से ही सार्थक होता है जीवन : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

सेवा ही सच्चे धर्म का स्वरूप, मानव सेवा और जीवदया से ही सार्थक होता है जीवन : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज   पूजा-पाठ के साथ हृदय में करुणा और हाथों में सेवा का भाव होना ही सच्ची धार्मिकता; जरूरतमंदों की सहायता और प्रत्येक जीव के प्रति दया ही धर्म की वास्तविक पहचान सोनकच्छ। […]

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आत्मा को पहचानना है तो रिश्तों के आकर्षण और मोह से ऊपर उठना होगा : गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी

आत्मा को पहचानना है तो रिश्तों के आकर्षण और मोह से ऊपर उठना होगा : गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी केशवरायपाटन। संसार में मोह का नशा ऐसा है, जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से दूर कर देता है। शराब का नशा तो कुछ समय बाद उतर जाता है, लेकिन मोह का नशा जीव को […]

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आत्मज्ञान होने पर दुख भी सुख जैसा अनुभूत होने लगता है, प्रतिकूल परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही सच्चा सुख है” : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर* 

*”आत्मज्ञान होने पर दुख भी सुख जैसा अनुभूत होने लगता है, प्रतिकूल परिस्थितियों में समता बनाए रखना ही सच्चा सुख है” : निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर* *9 नवंबर को भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव पर निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा* कुण्डलपुर(दमोह)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने आत्मज्ञान, निर्विकल्पता, कर्म सिद्धांत और समता […]

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आचार्य श्री समय सागर जी को बावनगजा महामस्ताकभिषेक और वर्षायोग का श्रीफल भेंट किया

*आचार्य श्री समय सागर जी को बावनगजा महामस्ताकभिषेक और वर्षायोग का श्रीफल भेंट किया **धामनोद//(निप्र) संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी महा मुनिराज के पट्ट शिष्य एवं नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज को गत दिवस बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारियों और ट्रस्टियों ने भोपाल पहुंच कर बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर पधारने के लिए […]

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स्वार्थ से सेवा की ओर समाज को नई दिशा कौन देगा? स्वयं से शुरुआत करें : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी

स्वार्थ से सेवा की ओर समाज को नई दिशा कौन देगा? स्वयं से शुरुआत करें : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी   “युवा की ऊर्जा और महिलाओं की करुणा से आएगी सामाजिक बदलाव की क्रांति”; बोले आचार्यश्री- मंदिर में घंटा बजाना आसान, किसी अनजान मरीज को रक्तदान करना भी सच्ची पूजा /पुष्पगिरी तीर्थ (सोनकच्छ)। आज समाज […]

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मां के चरणों में संस्कारों की विरासत… आरके मार्बल परिवार की मातृशक्ति चतुर देवी जी की स्मृतियों में भावुक कर देने वाली तस्वीर

मां के चरणों में संस्कारों की विरासत… आरके मार्बल परिवार की मातृशक्ति चतुर देवी जी की स्मृतियों में भावुक कर देने वाली तस्वीर   जो शोक से रहित हो, वही होता है ‘अशोक’… मां के चरणों में बैठकर मिला संस्कारों और आशीर्वाद का यह अनमोल खजाना।   कुछ तस्वीरें केवल तस्वीरें नहीं होतीं, वे अपने […]

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रामगंजमंडी आर्जव सागर महाराज सानिध्य कवि सम्मलेन 2oct 2011 छाया झलकिया

रामगंजमंडी आर्जव सागर महाराज सानिध्य कवि सम्मलेन 2oct 2011 छाया झलकिया

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जैसी हमारी दृष्टि होती है, वैसी ही हमारी सृष्टि बनती है। -मुनि श्री समता सागर*

*जैसी हमारी दृष्टि होती है, वैसी ही हमारी सृष्टि बनती है। -मुनि श्री समता सागर* कुण्डलपुर(दमोह)।” संसार में ऐसा कोई विचार नहीं है जो सर्वथा गलत हो। प्रत्येक विचार को अनेकांत की दृष्टि से समझने की आवश्यकता है उपरोक्त उद्गार”निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने अनेकांतवाद के सिद्धांत को जीवन के व्यवहार से […]

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*संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए मन, समर्पण और पुरुषार्थ से जुटें : आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज*

*संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए मन, समर्पण और पुरुषार्थ से जुटें : आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज* नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर। गुरुदेव ने कहा कि जीवन में जब कोई संकल्प ले लिया जाता है, तो उसे साकार करने के लिए केवल विचार करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसी क्षण से पूरे मनोयोग के साथ […]

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2047 का भारत कैसा हो? विकसित राष्ट्र के साथ विकसित चेतना वाला मनुष्य भी जरूरी – अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

2047 का भारत कैसा हो? विकसित राष्ट्र के साथ विकसित चेतना वाला मनुष्य भी जरूरी – अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज तकनीक के साथ संस्कार, विकास के साथ करुणा और शिक्षा के साथ नैतिकता ही बनाएगी भारत को सच्चे अर्थों में विकसित राष्ट्र औरंगाबाद/सोनकच्छ। भारत वर्ष 2047 में अपनी आजादी के 100 वर्ष पूर्ण […]

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