तप, त्याग और वैराग्य का अद्भुत दृश्य: राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का केशलोंच प्रारंभ, श्रद्धा से नतमस्तक हुआ श्रद्धालु समाज
मधुबन/श्री सम्मेदशिखर। दिगंबर जैन परंपरा की महान तप-साधना का अनुपम दृश्य आज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय धरा पर देखने को मिला, जब राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने प्रातः 6:00 बजे अत्यंत शांत, गंभीर और आध्यात्मिक वातावरण में केशलोंच की पवित्र प्रक्रिया प्रारंभ की। इस अलौकिक क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाएँ एवं मुनि संघ उपस्थित रहे। गुरुदेव की कठोर तपश्चर्या, अद्वितीय धैर्य और समता को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे तथा श्रद्धा से नतमस्तक हो गए।
दिगंबर जैन परंपरा में केशलोंच को तप, त्याग, आत्मसंयम और देहाभिमान के पूर्ण परित्याग का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। यह साधना केवल बाहरी त्याग नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का सशक्त संदेश देती है।
मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज की अटल साधना, निर्विकार भाव और असाधारण सहनशीलता ने उपस्थित जनसमुदाय को गहन आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान की। संपूर्ण परिसर णमोकार महामंत्र की मंगल ध्वनि, श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने मौन भाव से गुरुदेव की तपश्चर्या का दर्शन कर आत्मकल्याण एवं धर्म आराधना का संकल्प लिया।
इस पावन अवसर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि तप, त्याग और संयम ही आत्मोन्नति तथा मोक्षमार्ग की सच्ची आधारशिला हैं।
— जानकारी स्रोत: अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 9929747312





