सम्यग्दर्शन का प्रथम द्वार है निःशंक श्रद्धा, देव-शास्त्र-गुरु पर अटूट विश्वास से ही खुलेगा मोक्षमार्ग : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज 

धर्म

सम्यग्दर्शन का प्रथम द्वार है निःशंक श्रद्धा, देव-शास्त्र-गुरु पर अटूट विश्वास से ही खुलेगा मोक्षमार्ग : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज 

कोटा, 5 अगस्त।

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में विराजमान परम पूज्य ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में आध्यात्मिक ज्ञान की अविरल गंगा प्रवाहित हुई। आचार्य समन्तभद्र स्वामी विरचित ग्रंथराज रत्नकरण्ड श्रावकाचार के श्लोक क्रमांक 11 का अत्यंत सरल, सारगर्भित एवं तत्त्वज्ञानपूर्ण विवेचन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि सम्यग्दर्शन का प्रथम सोपान “निःशंकित अंग” है। सच्चे देव, शास्त्र और गुरु के प्रति अटूट एवं निष्कंप श्रद्धा ही आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग का प्रथम द्वार है।

 

 

धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि जिनवाणी, आगम और सच्चे गुरु के स्वरूप को जैसा है, वैसा ही स्वीकार करना चाहिए। श्रद्धा में किसी प्रकार का संशय सम्यग्दर्शन की प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि तलवार की धार पर टिके जल की भांति अडिग, अविचल और निष्कंप विश्वास ही “निःशंकित अंग” कहलाता है।

 

मुख्य संयोजक चातुर्मास 2026 श्री हुकम जैन ‘काका’ ने बताया कि धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जिनवाणी का श्रवण किया तथा सम्यग्दर्शन के प्रथम अंग के गूढ़ रहस्यों को आत्मसात किया।

आप्तवाणी और गुरु परंपरा ही सच्चे सन्मार्ग का आधार

मुनिश्री ने कहा कि संसार रूपी भवसागर से पार उतरने का मार्ग वही है, जिस पर आप्त पुरुष स्वयं चले हैं। यही जिनवाणी, आगम और गुरु परंपरा का अखंड प्रवाह है। उन्होंने कहा कि जो साधक देव, शास्त्र, गुरु एवं सप्ततत्त्वों के प्रति निष्कंप श्रद्धा रखता है, वह अज्ञान, मोह और भ्रम से मुक्त होकर आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सम्यग्दर्शन प्राप्त होने पर चोर भी निरंजन बन सकता है, इसलिए प्रत्येक जीव के लिए आत्मोन्नति का द्वार सदैव खुला है।

आत्मा और शरीर का भेदज्ञान समझे बिना मोक्ष संभव नहीं

अपने ओजस्वी प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि शरीर और आत्मा सर्वथा भिन्न हैं। इस भेद-विज्ञान को समझे बिना मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ना संभव नहीं है। जब साधक भय, संशय और मोह से ऊपर उठकर धर्मायतनों में दृढ़ श्रद्धा स्थापित करता है, तभी सम्यग्दर्शन का प्रथम अंग प्राप्त होता है। पहले श्रद्धा दृढ़ होती है, उसके पश्चात साधना सफल बनती है और मोक्षमार्ग प्रशस्त होता है।

विशिष्ट श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद, मंदिर परिसर भक्ति से हुआ गुंजायमान

धर्मसभा में बाहर से पधारे विशिष्ट श्रद्धालु श्री संजय निर्वाण, श्री पारस सोगानी (पूर्व अध्यक्ष, खंडेलवाल समाज) एवं इंजीनियर श्री राजेन्द्र जैन ने मुनिश्री के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। चातुर्मास स्वागत समिति द्वारा सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर पूजन, अर्घ्य समर्पण, जिनवाणी वंदना एवं विविध धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा मंदिर परिसर णमोकार महामंत्र, गुरुभक्ति और जिनवाणी के मंगलमय स्वरों से गुंजायमान रहा।

आर.के. मार्बल ग्रुप की श्रीमती सुशीला पाटनी ने प्राप्त किया आहारचर्या का पुण्यलाभ

प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री राजेन्द्र जी, श्री हुकम जैन ‘काका’, श्री प्रकाश हरसोरा परिवार तथा श्रीमती सुशीला पाटनी एवं श्री विवेक ठोरा परिवार द्वारा प्राप्त किया गया।

निर्माण मंत्री सुनील माडिया ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन श्री कैलाशचंद जी, श्री चंद्रप्रकाश जी, श्री मुकेश जी, श्री चिराश जी, श्री महिमा जी एवं समस्त ठग परिवार (आंवा वाले), वसंत विहार, कोटा द्वारा अपनी सुपुत्री कु. देशना जैन के जन्मदिवस के पावन अवसर पर श्रद्धाभाव से सम्पन्न किया गया।

श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन श्री वीरेन्द्र जी, श्री जगदीश जी, श्रीमती शीतल जैन एवं समस्त परिवार, तलवंडी द्वारा प्राप्त किया गया।

उपाध्यक्ष श्री सुमित जैन एवं श्री मनोज बगड़ा ने जानकारी दी कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य सुधा जी चंबल डेयरी परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि क्षुल्लक श्री संयम सागर जी के आहारदान का पुण्यलाभ श्री अशोक पाटनी एवं श्रीमती सुशीला पाटनी (आर.के. मार्बल ग्रुप) परिवार को प्राप्त हुआ। श्रीमती सुशीला पाटनी ने संघ का मंगल आशीर्वाद लेकर आहारचर्या का दुर्लभ पुण्य अर्जित किया।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *