सबसे बड़ा करियर ‘अच्छा इंसान बनना’ है : आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज का युवाओं को प्रेरक संदेश
इंदौर, नेमी नगर जैन कॉलोनी।
आज के दौर में जहां युवा बेहतर करियर, ऊंची नौकरी और अधिक धन कमाने की होड़ में लगे हैं, वहीं आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज ने जीवन की सबसे बड़ी सफलता का नया सूत्र देते हुए कहा कि “सबसे बड़ा स्कोप अच्छे इंसान बनने में है।”
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य डॉक्टर, इंजीनियर, व्यवसायी या किसी भी क्षेत्र में सफल बन सकता है, लेकिन यदि वह अच्छा इंसान नहीं बन पाया तो उसकी सफलता अधूरी है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में अच्छे इंसानों की सबसे अधिक आवश्यकता है और यही ऐसा क्षेत्र है जिसमें न कोई प्रतियोगिता है और न ही कोई सीमा।
आचार्य श्री ने तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागरजी महाराज का एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक युवक ने गुरुदेव से पूछा कि वह किस क्षेत्र में अपना श्रेष्ठ करियर बनाए। इस पर तपस्वी सम्राट ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया— “अच्छा इंसान बनो, फिलहाल इसी क्षेत्र में सबसे अधिक स्कोप है।” यह उत्तर सुनकर पूरा वातावरण प्रेरणा से भर उठा।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य सच्चे अर्थों में इंसान नहीं बनता, तब तक वह भगवान को भी नहीं पहचान सकता। भगवान बनने की कल्पना करने से पहले अपने भीतर मानवता, करुणा और आत्मचिंतन का विकास करना आवश्यक है।
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने भौतिकवाद पर भी गहरी बात रखते हुए कहा कि आज अनेक लोग धन, पद और वैभव के पीछे भागते-भागते अपनी इंसानियत तक खो देते हैं। ऐसे लोग अपनी ज़मीर बेचकर ज़मीन तो इकट्ठी कर लेते हैं, लेकिन आत्मज्ञान और तत्वज्ञान से दूर रह जाते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि जड़ पदार्थों के मोह में पड़कर चेतन आत्मा को नहीं भूलना चाहिए। विशाल महल, अपार संपत्ति और सांसारिक वैभव कभी भी स्थायी नहीं होते। उन्होंने कहा कि “न महल हमारी शरण है और न हम महल की शरण में हैं। हमारी वास्तविक शरण केवल अपनी आत्मा है।”
प्रवचन के अंत में आचार्य श्री ने सभी श्रद्धालुओं से आत्मकल्याण, मानवता, संवेदनशीलता और आत्मचिंतन का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि धन-संपत्ति नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्तित्व है जो समाज और मानवता के लिए प्रेरणा बन सके।
जानकारी: माही जैन धीरावत, पीपलखूंट (प्रतापगढ़)
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी





