उपसर्ग कितना भी बड़ा हो समता,क्षमा ,शांति सहनशीलता से कर्मों का क्षय होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उपसर्ग कितना भी बड़ा हो समता,क्षमा ,शांति सहनशीलता से कर्मों का क्षय होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी जयपुर वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जयपुर के विभिन्न मंदिरों उपनगरों में प्रवास चल रहा है 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय निर्माण नगर में प्रवेश के अवसर पर आयोजित धर्म सभा […]
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