स्मृति नगर में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश, आत्मस्मृति का दिया संदेश, कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय का किया अवलोकन
इंदौर। स्मृति नगर।23 जुलाई।
परम पूज्य आचार्य श्री108 सुनील सागर जी महाराज ससंघ का लंबा मंगल विहार विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ स्मृति नगर पहुँचा। मार्ग में वर्षा सहित अनेक प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद संघ ने अपने तप और संयम की साधना को निरंतर बनाए रखा। श्रद्धालुओं के प्रयास और समर्पण से संघ का स्मृति नगर आगमन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ हुआ।
अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को पदार्थों की स्मृति रहती है, उसी प्रकार यदि आत्मा और परमात्मा की भी स्मृति बनी रहे तो जीवन का वास्तविक कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी वैभव और प्रपंच में उलझे रहने से अंततः कुछ भी प्राप्त नहीं होता। आत्मस्मरण और भगवान की स्मृति ही जीवन को सार्थक बनाती है।

आचार्य श्री ने भेद विज्ञान को आत्मकल्याण का सर्वोच्च विज्ञान बताते हुए कहा कि यही आत्मा और पर का यथार्थ बोध कराता है। संसार का कोई भी आधुनिक विज्ञान आत्मसाक्षात्कार नहीं करा सकता, जबकि भेद विज्ञान मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव कराता है। उन्होंने कहा कि जितने भी सिद्ध भगवान हुए हैं, वे भेद विज्ञान के कारण ही सिद्ध पद को प्राप्त हुए हैं तथा भेद विज्ञान के अभाव में जीव संसार में भटकता रहता है।
उन्होंने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शरीर की सीमाओं के बीच रहकर भी जो साधक आत्मज्ञानपूर्वक तप करता है, वही सच्चा तपस्वी कहलाता है और अपने कर्मों की निर्जरा करता है। उन्होंने तप, संयम और आत्मचिंतन को जीवन की सर्वोच्च साधना बताया।

मंगल विहार के दौरान संघ छावनी से प्रस्थान कर जवारी बाग नसिया, रामचंद्र नगर सहित विभिन्न स्थानों पर पहुँचा, जहाँ शभगवान के दर्शन एवं शांतिधारा का लाभ प्राप्त किया। इस विहार के दौरान तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की तपोभूमि का भी स्पर्श हुआ जहां उन्होंने लगभग 9 महीने तक तपस्या की थी आचार्य श्री ने उनके अद्वितीय तप का स्मरण करते हुए बताया कि उन्होंने अपने जीवन में दस हजार से अधिक निर्जल उपवास किए, मुनि दीक्षा के बाद घी, शक्कर और तेल जैसे पदार्थों का स्पर्श तक नहीं किया तथा आचार्य पद प्राप्ति के बाद अन्न का त्याग कर सिंहनिष्क्रीड़ित जैसे महान व्रतों का पालन किया।

इसी क्रम में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने मुनि संघ के साथ इंदौर स्थित कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के सान्निध्य में धर्म, संयम और जीवदया के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
पूज्य गुरुदेव ने मानव मात्र का कल्याण नहीं किया अभी तो प्राणी मात्र के प्रति उनकी करुणा आशीष बरसती है हमने देखा है कि मूक पशु भी गुरुदेव के समक्ष आकर बैठते हैं और गुरुदेव का वात्सल्य आशीष जब उन पर बरसता है तो वह उनकी करुणा वात्सल्य एवं जीव दया परोपकार के प्रति उनका अनुराग एवं उनका दिया हुआ संदेश से जीवंत होता है।
माही जैन धीरावत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

