पंचकल्याणक महोत्सव के बाद जिनशासन क्षेत्र में पहली बार होगा चातुर्मास, मुनिश्री निष्पक्ष सागर व निस्पृह सागर महाराज का मंगल प्रवेश 26 जुलाई को

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पंचकल्याणक महोत्सव के बाद जिनशासन क्षेत्र में पहली बार होगा चातुर्मास, मुनिश्री निष्पक्ष सागर व निस्पृह सागर महाराज का मंगल प्रवेश 26 जुलाई को

 

अजमेर।

जिनशासन क्षेत्र, अजमेर में आयोजित भव्य पंचकल्याणक महोत्सव के पश्चात अब पहली बार चातुर्मास का ऐतिहासिक सौभाग्य प्राप्त होने जा रहा है। आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 निस्पृह सागर जी महाराज इस वर्ष जिनशासन क्षेत्र में चातुर्मास करेंगे। मुनिसंघ की स्वीकृति मिलते ही समूचे जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।

 

 

समाजजनों द्वारा श्रीफल भेंट कर किए गए विनम्र निवेदन के उपरांत मुनिसंघ से चातुर्मास की स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके साथ ही समाज ने चातुर्मास की तैयारियां भी युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दी हैं।

 

 

शुक्रवार प्रातः 7:15 बजे मुनिसंघ अलवर गेट से मंगल विहार करते हुए केसरगंज स्थित जैसवाल दिगंबर जैन मंदिर पहुंचेगा, जहां धर्मसभा का आयोजन होगा। इसके पश्चात 26 जुलाई को मुनिसंघ का जिनशासन क्षेत्र में मंगल प्रवेश होगा। वहीं 9 अगस्त को विधि-विधान के साथ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना संपन्न होगी।

 

मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज : 2007 से साधना की अखंड यात्रा

मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज का गृहस्थ जीवन का नाम आलोक जैन था। आपका जन्म 11 अक्टूबर 1975 को जबलपुर में हुआ। 22 दिसंबर 2007 को सागर जिले के टडा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सानिध्य में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। इसके बाद 10 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र के अतिशय क्षेत्र रामटेक (नागपुर) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनि दीक्षा प्राप्त कर “मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज” नाम से दीक्षित हुए।

 

मुनिश्री निस्पृह सागर महाराज : वैराग्य और संयम की प्रेरक साधना

 

मुनिश्री 108 निस्पृह सागर महाराज का गृहस्थ जीवन का नाम अनुराग जैन था। आपका जन्म 23 दिसंबर 1976 को जबलपुर में हुआ। आपने बी.एससी. तक शिक्षा प्राप्त की। 22 दिसंबर 2007 को ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने के बाद 10 अगस्त 2013 को रामटेक (जिला नागपुर, महाराष्ट्र) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण कर “मुनिश्री 108 निस्पृह सागर महाराज” नाम प्राप्त किया।

 

जिनशासन क्षेत्र में दोनों मुनिराजों का चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, संयम, स्वाध्याय और संस्कारों की नई चेतना का केंद्र बनेगा। श्रद्धालुओं को चार माह तक धर्मोपदेश, साधना और आत्मकल्याण का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा।

 

— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

 

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