जीवन की सार्थकता खड़े होकर निकलने से है आडे होकर निकलना मृत्यु अर्थी का प्रतीक है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पारसोला। 
आज प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के संयम उपकरण सिंहासन, पीछी, कमंडल शास्त्र का नगर में आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में भव्य मंगल प्रवेश हुआ संपूर्ण समाज द्वारा निर्धारित गणवेश में शामिल होकर संयम उपकरणों की आगवानी की ।इंद्र देवता भी पीछे नहीं रहे नगर में जुलूस निकालने के पहले रिमझिम बरसात कर जैसे उन्होंने भूमि शुद्ध कर वातावरण को मंगलमय बनाया शोभा यात्रा का समापन सन्मति भवन में हुआ जहां आयोजित धर्म सभा को संबोधित कर आचार्य श्री ने बताया कि भोगों की प्रधानता वाली भोग भूमि में धर्म नहीं होता था ,भोग भूमि के बाद कर्मभूमि का प्रारंभ हुआ। आदिनाथ भगवान ने असि ,मसि कृषि ,शिल्प ,कला ,वाणिज्य का जीवन यापन के लिए उपदेश दिया ।आज आचार्य शांति सागर जी के संयम उपकरण पीछी, कमंडल शास्त्र तथा सिंहासन पारसोला आए हैं । संयम उपकरण इस बात के प्रतीक है कि इन्हें धारण कर जीवन का आप उत्थान कर सकते हैं। आचार्य
शिवसागर जी कहते थे कि व्यक्ति को घर से खड़े-खड़े होकर निकलना चाहिए अर्थात दीक्षा धारण करना चाहिए आड़े होकर निकलना अर्थात अर्थी मृत्यु का प्रतीक है खड़े होकर निकलकर दीक्षा लेने से जीवन सार्थक होता है। आचार्य श्री ने बताया कि संसारी प्राणी जन्म से लेकर मृत्यु का जीवन कैसे जीना है यह भूल रहे हैं आचार्य शांति सागर जी ने अपने जीवन को धर्म मय, मंगलमय बनाया ।उन्होंने संलेखना के माध्यम से मृत्यु का आलिंगन किया संलेखना से जीवन को मंगलमय बनाया।
आज दोपहर को तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रमुख पात्रों को हल्दी और मेहंदी लगाने का कार्यक्रम स्थानीय समाज द्वारा किया गया।16 पहाड़ों से घिरी नगरी पारसोला का पुण्य प्रबल है जहां पर प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव उनकी परंपरा के पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में आगामी माह में राष्ट्रीय स्तर का 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तीन दिवसीय कार्यक्रम मनाया जावेगा। अनेकों जिनालयों और अनेकों संतों की जन्मस्थली इस नगरी का यह गौरव शाली इतिहास है कि यहां आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को सन 1990 में आचार्य पद प्राप्त हुआ ।उसके बाद आचार्य श्री ने अपने प्रथम मुनि शिष्य श्री ओम सागर जी तथा प्रथम आर्यिका श्री वैराग्य मति जी को इसी पावन धरा पारसोला में भव्य दीक्षा दी। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 50 से अधिक साधुओं की पावन उपस्थिति में तीन दिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत प्रतिष्ठा आचार्य हसमुख जी शास्त्री के निर्देशन में दिनांक 13 अक्टूबर को प्रातः शोभा यात्रा ,घटयात्रा भूमि शुद्धि 108 से अधिक कन्याओं द्वारा किया जावेगा, राजस्थान राज्य के प्रसिद्ध भामाशाह अशोक जी , सुरेश जी ,विमल जी पाटनी आर के मार्बल ग्रुप किशनगढ़ द्वारा किया ध्वजारोहण किया
जावेगा।,मंडप उद्घाटन अहमदाबाद के सौभाग्यमल श्रीमती नीलम राजेंद्र कटारिया परिवार, मंगल कलश स्थापना श्रीमती वाणी विपीन तथा पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन श्रीमती आनंदीबेन किरीट कोठारी अहमदाबाद द्वारा किया जावेगा। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की प्रतिमा का अनावरण और लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया जाएगा। ऋषभ पचोरी जयंतीलाल कोठारी प्रवीण जैन
अनुसारआचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की जावेगी। दोपहर को आचार्य शांति सागर जी की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक तथा 108 द्रव्यों से महाअर्चना और आचार्य शांति सागर विधान की पूजन शताधिक इंद्रो सहित राजेश बी शाह अहमदाबाद सौधर्म इन्द्र द्वारा की जावेगी। राजेश पंचोलिया अनुसार विन्यांजलि सभा के बाद रात्रि को बड़वाह के संजय महाजन पार्टी के द्वारा आचार्य शांति सागर गौरव गाथा का मंचन किया जावेगा। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
