आत्मा में निर्विकल्प साम्यभाव, राग द्वेष मोह रहित धारण करना मोक्ष मार्ग है।मुनि श्री चिंतन सागर जी 19 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा
आत्मा में निर्विकल्प साम्यभाव, राग द्वेष मोह रहित धारण करना मोक्ष मार्ग है।मुनि श्री चिंतन सागर जी 19 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा सीकर मनुष्य पर्याय में तीर्थंकर जैन कुल मिलना बहुत ही सौभाग्य और पुण्य की बात है ।सीकर का सौभाग्य है कि यहां पर विशाल आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ […]
Read More