मन को जीत लो, दुनिया अपने आप आपकी हो जाएगी” : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज
गुरु मत बदलो, णमोकार महामंत्र कभी मत छोड़ो, धर्म के पीछे चलो तो धन स्वयं पीछे आएगा’ सुधासागर महाराज
इंदौर।
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि संसार में अक्सर मनुष्य भगवान, गुरु अथवा दुनिया से यह शिकायत करता है कि कठिन समय में किसी ने उसका साथ नहीं दिया। जबकि वास्तविकता यह है कि यदि मनुष्य अपने मन और बुद्धि को अपना सच्चा साथी बना ले, तो पूरी दुनिया उसके साथ खड़ी दिखाई देने लगेगी।
मुनिश्री ने कहा कि प्रश्न यह नहीं है कि “तुम अच्छे क्यों नहीं बनना चाहते?” बल्कि प्रश्न यह है कि “तुम अच्छे क्यों नहीं बनते?” प्रत्येक व्यक्ति के भीतर धर्म, सद्भाव और श्रेष्ठ बनने की क्षमता पहले से मौजूद है, लेकिन वह अपने ही अच्छे विचारों को नकारात्मक सोच से नष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि संसार की प्रतिकूल परिस्थितियां अनुकूल बन सकती हैं, लेकिन सबसे पहले अपने मन को अपने अनुकूल बनाना होगा। आप यह खबर भी पढ़े
गुरु बदलने की भूल कभी न करें
मुनिश्री ने कहा कि सच्चा गुरु अपने शिष्य के जीवन की दिशा और भाग्य बदलने की क्षमता रखता है। जिनेंद्र भगवान के दर्शन और सच्चे गुरु की कृपा से जीवन में चमत्कारी परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कैसी भी विपत्ति आए, देव, शास्त्र और गुरु की आराधना कभी नहीं छोड़नी चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाते हुए कहा, “भले ही जीवन समाप्त हो जाए, लेकिन णमोकार महामंत्र का जाप कभी मत छोड़ना। जिसका जीवन में गुरु नहीं, उसका वास्तविक जीवन प्रारंभ ही नहीं हुआ।”
मन को अपना सेवक बनाइए, स्वामी नहीं
मुनिश्री ने कहा कि माला फेरते समय मन चंचल हो जाता है, लेकिन फिल्म देखते समय नहीं। इसका कारण यह है कि मन वहीं जाता है, जहां हम उसे जाने देते हैं। अब समय आ गया है कि हम मन के पीछे न भागें, बल्कि मन हमारे पीछे चले।
उन्होंने कहा कि हमारी आंखें वही देखें जो हम देखना चाहते हैं, कान वही सुनें जो सुनना उचित हो और मुख से वही शब्द निकलें जिनके लिए कभी “आई एम सॉरी” न कहना पड़े।
धर्म के पीछे चलो, धन स्वयं पीछे आएगा
प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि लोग धन कमाने के पीछे भागते हैं, जबकि जैन दर्शन सिखाता है कि धर्म को जीवन में सर्वोच्च स्थान दो, धन स्वयं तुम्हारे पीछे आएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर को अपना घर बना लो, जीवन सार्थक हो जाएगा। संसार को छोड़ोगे तो संसार स्वयं तुम्हारे पीछे आएगा।
भक्त भगवान से अनमोल आशीर्वाद मांगे
मुनिश्री ने कहा कि अधिकांश लोग भगवान से छोटी-छोटी सांसारिक वस्तुएं मांगते हैं, जबकि भगवान से ऐसा आशीर्वाद मांगना चाहिए जिससे जीवन में परमार्थ, सदाचार और आत्मकल्याण की खेती हो सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “हम भगवान से गेहूं और चावल के बजाय भूसा मांग बैठते हैं।”
कार्यक्रम का मंगलाचरण दिगम्बर जैन समवशरण बहु मंडल टीम द्वारा किया गया। दीप प्रज्ज्वलन सुरेश-अतुल जैन एवं शरद-सुषमा जैन परिवार ने किया। शांतिधारा का सौभाग्य मुकेश-सुनीता जैन को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन अनुराग जैन ने किया तथा आभार छत्रपति नगर समाज अध्यक्ष भूपेंद्र जैन एवं महामंत्री विपुल बांझल ने व्यक्त किया। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




