आत्मचिंतन, संयम और साधना से ही होती है आत्मानुभूति की प्राप्ति : मुनि श्री निर्णयसागर महाराज
‘विदिशा।
श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर (स्टेशन जैन मंदिर), माधवगंज में आयोजित धर्मसभा में पाठशाला प्रणेता मुनि श्री 108 निर्णयसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य अपने शुद्ध आत्मस्वरूप की पहचान करना है। जब तक जीव शरीर, मन, राग और द्वेष को ही अपना स्वरूप मानता है, तब तक वह बहिरात्मा की अवस्था में रहता है। आत्मा को उसके शुद्ध चेतन स्वरूप में जानना ही अंतरात्मा बनने की पहली सीढ़ी है।
उन्होंने कहा कि चित्त को चित्त, दोष को दोष और आत्मा को आत्मा के रूप में समझना ही सम्यग्दृष्टि का आधार है। व्यक्ति को पाप से द्वेष करना चाहिए, पापी से नहीं। आत्मा और उसके विकारों के बीच का भेद समझना ही वास्तविक विवेक है।
मुनि श्री ने भगवान के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की पहचान बाहरी आडंबर, वस्त्र अथवा आभूषणों से नहीं, बल्कि उनकी वीतरागता से होती है। उन्होंने बताया कि अरिहंत भगवान अठारह दोषों से रहित होते हैं। उनमें राग, द्वेष, मोह, भय, रोग, शोक सहित सभी विकारों का पूर्ण अभाव होता है।
धर्मसभा में उन्होंने चिंता को मनुष्य के दुःख का सबसे बड़ा कारण बताते हुए कहा कि व्यक्ति जो प्राप्त है उसका आनंद लेने के बजाय, जो नहीं मिला उसकी चिंता में जीवन व्यतीत करता है। उन्होंने सभी से जीवन में प्राप्त सुख, अवसर और भगवान की कृपा के प्रति सदैव कृतज्ञ रहने का संदेश दिया।
मुनि श्री ने दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस पुण्यभूमि में जन्म, पालन-पोषण और उन्नति का अवसर मिला हो, उसके प्रति समर्पण का भाव रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने निश्चय और व्यवहार—दोनों दृष्टियों का समन्वय समझाते हुए कहा कि ध्यान और स्वाध्याय के समय स्वयं को ज्ञाता-द्रष्टा शुद्ध आत्मा मानना चाहिए, जबकि व्यवहार में सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करना चाहिए। यही संतुलन आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
मुनि श्री ने कहा कि शुद्धोपयोग और आत्मानुभूति अत्यंत उच्च आध्यात्मिक अवस्थाएँ हैं, जिनकी प्राप्ति केवल कथन से नहीं, बल्कि निरंतर साधना, संयम और आत्मचिंतन से होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आगामी प्रवचनों में भी समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं अशोक सिंघई ‘गुड्डू’ ने बताया कि मुनि श्री के संघस्थ ब्रह्मचारी अमन भैया ने संघ में पहली बार केशलोंच किया। मुनि श्री के प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 8:15 बजे श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर (स्टेशन जैन मंदिर), माधवगंज, विदिशा में आयोजित हो रहे हैं। सकल दिगंबर जैन समाज एवं श्री शीतल विहार न्यास ने सभी श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने की अपील की है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




