आत्मा में निर्विकल्प साम्यभाव, राग द्वेष मोह रहित धारण करना मोक्ष मार्ग है।मुनि श्री चिंतन सागर जी 19 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा 

धर्म

आत्मा में निर्विकल्प साम्यभाव, राग द्वेष मोह रहित धारण करना मोक्ष मार्ग है।मुनि श्री चिंतन सागर जी

 

19 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा 

सीकर

मनुष्य पर्याय में तीर्थंकर जैन कुल मिलना बहुत ही सौभाग्य और पुण्य की बात है ।सीकर का सौभाग्य है कि यहां पर विशाल आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ समागम आपको मिला है ।संत समागम से जीवन उन्नत होता है। गुरु के शब्दों को कान खोल कर सुनना ,गुरु पर विश्वास आंखें बंद कर ,गुरु को समय का अर्पण दिल खोलकर करना चाहिए ।धर्म का प्रवचन सुनने के समय मुंह बंद रखें ,सेवा करते समय घड़ी बंद कर ले।

यह मंगल प्रवचन आर्यिका श्री महायश मती माताजी ने सीकर की धर्म सभा में प्रकट किये। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार माताजी ने आगे बताया कि गुरु से विनती करना हो तो झोली खोलना ,फैला लें गुरु का दर है यहां मनमानी नहीं चलती ,इस कारण परेशानी भी नहीं होती है ।आप लोग आचार्य श्री के साधु के दर्शन करते हैं उन्हें अपना कष्ट समस्या बताते हैं जबकि आचार्य परमेष्ठी साधु भगवान के सामने यही कहना चाहिए कि मेरे दुर्गुण दूर हो जाए, मेरा क्रोध कम हो जाए ,मेरा परिग्रह कम हो जाए ।जब आप ठीक होंगे तो कष्ट भी दूर हो जाएंगे ।अपनी कषायों को मंद कम करना चाहिए ।अपनी कमी बताना चाहिए। मंदिर दर्शन करने के लिए भगवान से भी यही कामना करना चाहिए कि आप जैसा मैं भी बनूं ,आपके गुण मुझ में भी आए ,जैसे अपने आठ कर्मों का नाश किया वैसे ही हम भी पुण्यशाली बने। भावों परिणाम के विशुद्धता बढ़ने से कर्मों की निर्जरा होती है। चार प्रकार के दान बताए गए हैं आहार दान औषधि दान अभय और शास्त्र दान होता है आहार दान देने से भोग इंद्रीय सुख की सामग्री मिलती है, अभय दान देने से सुंदर रूप मिलता है, औषधी दान देने से आरोग्य शरीर की प्राप्ति होती है ,और शास्त्र दान देने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।इसलिए धर्म सभा में श्रवण ओर स्वाध्याय विनय पूर्वक करना चाहिए

मुनि श्री चिंतन सागर जी ने अपने प्रवचन में बताया कि सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र को एकाग्रता से धारण करना चाहिए वही मोक्ष मार्गी होता है। तीन प्रकार के कर्म में भाव कर्म, द्रव्य कर्म और नौ कर्म की विवेचना कर बताया कि तीनों कर्मों से भिन्न आत्मज्ञान द्रव्य है। आपने सम्यक दर्शन , ज्ञान, चारित्र के गुणों के बारे में विवेचना की। आत्मा में निर्विकल्प साम्य भाव राग, द्वेष मोह रहित एकाग्रता एकाग्र होना ही मोक्ष मार्ग है।

 

 भव्य विशाल जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव

 *मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर सीकर में पहली बार परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के पावन सिद्ध हस्त कर कमलों से भव्य विशाल जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव दिनांक 19 अगस्त श्रावण शुक्ल सप्तमी बुधवार को आचार्य श्री धर्मसागर सभागार श्री पार्श्वनाथ भवन, दंग की नशिया, बजाज रोड*,सीकर (राजस्थान)में *आचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षायोग चातुर्मास समिति *श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आम्नाय प्रबंध समिति*द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज सीकर के सहयोग से भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएं होगी।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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