भार बनकर नहीं उपहार बनकर जीवन व्यतीत करें तभी नर पर्याय की सार्थकता है। उपाध्याय विकसंत सागर महाराज
भार बनकर नहीं उपहार बनकर जीवन व्यतीत करें तभी नर पर्याय की सार्थकता है। उपाध्याय विकसंत सागर महाराज निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री 108विनम्र सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विश्वमित सागर महाराज का निवाई से जहाजपुर के लिए मंगल विहार हुआ। मुनि श्री विश्वमित सागर महाराज निवाई […]
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