Collage of four head-and-shoulder portraits with Hindi captions above each image; left to right: an elderly person in a white headscarf, a bald young man, a smiling man with a beard, and a bald man raising his hand in a blessing gesture.

वर्षा योग की तैयारी में जुटा जैन समाज, शहर के आसपास विराजमान जैनमुनि संघों से चातुर्मास के लिए कर रहे निवेदन 

धर्म

वर्षा योग की तैयारी में जुटा जैन समाज, शहर के आसपास विराजमान जैनमुनि संघों से चातुर्मास के लिए कर रहे निवेदन 

 कोटा

शहर में दिगम्बर जैन समाज एक बार फिर वर्षायोग की तैयारियों में जुट गया है। आगामी दो माह में जैन संतों का चातुर्मास प्रारंभ होने जा रहा है। ऐसे में विभिन्न जैन संस्थाओंवर्षा योग की तैयारी में जुटा जैन समाज, शहर के आसपास विराजमान जैनमुनि संघों से चातुर्मास के लिए कर रहे निवेदन  समितियों और श्रद्धालुओं की ओर से संत संघों को कोटा में वर्षायोग के लिए आमंत्रित करने की गतिविधियां तेज हो गई हैं। संतों के आगमन की संभावनाओं के साथ शहर में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल बनने लगा है।

 सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष पारस बज ने बताया कि कोटा का दिगम्बर जैन समाज कही वर्षों से चातुर्मास का लाभ प्राप्त करता आ रहा है।

 

   कोटा में अब तक हुए वर्षायोग 

कोटा में अब तक आचार्य श्री शिवसागर जी महाराज, श्रुतसागरजी, चंद्रसागरजी वैराग्यनंदीजी, कनकनंदीजी, बालाचार्य योगेन्द्रसागरजी, सुधर्मसागरजी, शांतिसागरजी, विमर्शसागरजी, प्रज्ञासागरजी, सुधासागरजी, चिन्मयसागरजी, मल्लीसागरजी, तरुणसागरजी, और विश्वाससागर जी महाराज सहित अनेक संतों के वर्षायोग हो चुके हैं

 

  वर्षांयोग के दौरान संत धर्म प्रवचन, साधना और स्वाध्याय के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करते हैं। समाजजनों का मानना है कि चातुर्मास से शहर में आध्यात्मिक वातावरण मजबूत होता है और युवा पीढ़ी को संस्कार व संयम की प्रेरणा मिलती है। सकल दिगम्बर जैन समाज के प्रवक्ता मनोज जैन ने बताया कि कोटा शहर और आसपास विराजमान जैन मुनियों व आर्यिकाओं का वर्षांयोग कोटा हो इस हेतु प्रयास किया जा रहा है।पूर्णमति माताजी, स्वस्तिभूषण माताजी, विभाश्री माताजी और विशुद्धमति माताजी के चातुर्मास भी शहर में विशेष आकर्षण का केंद्र रहे हैं।

 

कोटा में स्वस्तिभूषण माताजी

1 नवंबर 1969 को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा-सिवनी क्षेत्र में जन्मी भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105स्वस्तिभूषण माताजी ओजस्वी वक्ता, साहित्यकार और समाज जागरण की प्रेरक हैं। वे 100 से अधिक ग्रंथों की रचना कर चुकी हैं

 

आरकेपुरम में प्रणीतसागर

इंदौर में 6 मार्च 1984 को जन्मे मुनि श्री 108 प्रणीतसागर महाराज ने प्रोफेसर पद पर कार्यरत रहते वैराग्य मार्ग अपनाया। वर्ष 2013 में नागपुर में मुनि दीक्षा ग्रहण की। वे हिंदी और अंग्रेजी के कुशल लेखक एवं अनुवादक है

 

तलवंडी जैन मंदिर में निरोगसागर

2 अगस्त 1976 को पिपरिया, सागर (मप्र) में जन्मे मुनि निरोगसागर महाराज का सांसारिक नाम उपेंद्र जैन था। उन्होंने 13 वर्षों तक भौतिकी के प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2013 में रामटेक में आचार्य विद्यासागर महाराज से मुनि दीक्षा प्राप्त की।

 

बूंदी के जैन मंदिर में मुनि योग सागर महाराज

कर्नाटक के सदलगा में 13 सितंबर 1956 को जन्मे मुनि योगसागर महाराज का मूल नाम अनंतनाथ जैन है। वे आचार्य विद्यासागर महाराज के सगे भाई हैं। 15 अप्रैल 1980 को सागर (मप्र) में आचार्य विद्यासागरजी से मुनि दीक्षा ग्रहण की। वे तपस्वी संत होने के साथ उत्कृष्ट लेखक और कवि भी हैं।

             संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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