मनुष्य का मन अनुभूत है –?**मन हँसाता भी है, रूलाता भी है।अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज

मनुष्य का मन अनुभूत है –?**मन हँसाता भी है, रूलाता भी है।अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज   कुलचाराम हैदराबाद  अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा किमनुष्य का मन अनुभूत है –?*मन हँसाता भी है, रूलाता भी है।*मन मित्र भी बनाता है, तो दुश्मन भी बना देता है।मन दिशा भी देता है और […]

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जैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है –एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

जैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है –एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज कुलचाराम हैदराबाद अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा किजैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है,एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!     उन्होंने कहा की श्रावक धर्म कहता है – यदि […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *ये तीन कार्य व्यर्थ है –* (1) सबको खुश करने की कोशिश, (2) बदले का भाव, और (3) गुजरे हुए वक्त में डूबे रहना।         *संसार स्वार्थ से चलता है।* आप कुछ भी करो, कुछ भी कहो, ये संसार बिन स्वार्थ के नहीं चल सकता।   बेटे चार प्रकार के […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *किसी अच्छे इंसान से कोई गलती हो जाये तो सहन कर लो। क्योंकि सोना यदि कीचड़ में गिर जाये तो उसकी कीमत कम नहीं हो जाती।*       कभी-कभी थोड़ा सहन करना भी चाहिए। *दुनिया का हर पुरुष अपनी पत्नी में सीता, सावित्री जैसी सुशील और मृदुभाषी रूप चाहता है।* पर क्या […]

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*अन्तर्मना उवाच 

*अन्तर्मना उवाच*  *जो समर्पण से मिल सकता, वो अकड़ने से कभी नहीं मिल सकता..* *बड़ो के सामने बड़े बनोगे तो विरोध होगा और यदि छोटे बन जाओगे तो सब कुछ मिल जायेगा..!*       प्रभु की छाँव और गुरू की ठाँव बड़े नसीबों से मिलती है। *जिस पर प्रभु और गुरु कृपा बरस रही […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *कौन कहता है इंसान रंग नहीं बदलता–?* *किसी के मुंह पर सच कहकर तो देखिये,* *एक नया रंग ही सामने आयेगा..!*       *मैं लोगों से कहता हूँ –* लड़ लो, झगड़ लो, अपने को रोक न सको तो पिट–पिटा लो, मगर झगड़े के दो घड़ी बाद, घंटा भर बाद, *झगड़े को […]

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अन्तर्मना उवाच* 

*अन्तर्मना उवाच*  *समझदारी इसी में है कि* — *जितनी चादर, उतने पैर फैलाओ..* *अन्यथः कभी भी हाथ फैलाने की नौबत आ सकती है..!* समय से पहले इच्छाओं को ना दबाया गया तो इच्छायें ही इन्सान की दुश्मन बन जाती है। *इच्छा और शौक इन्सान को बुराई की ओर आकर्षित करते हैं।* इन्सान इच्छाओं के चलते […]

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अन्तर्मना उवाच*

*अन्तर्मना उवाच* *दुनिया की खबर रखने वाला इंसान..* *ज़िन्दगी के अन्तिम क्षणों तक,* *अपने से — बेखबर बना रहता है..!*       इसलिए — सांझ होने से पहले एक दीप जला लेना। *आओ* अब घर लौट चलें, बाहर बहुत भटक लिये, अब इस भटकन का अंत करें। *सांझ होते ही पशु पक्षी भी अपने […]

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अन्तर्मना उवाच*

अन्तर्मना उवाच* पुरूषार्थ करने से पौरुष्य नहीं जाता, *धर्म करने से अधर्म नहीं ठहरता..* *मौन रहने से कलह नहीं होती,* *जीओ और जीने दो को अपनाने से परमात्मा नहीं रूठता..!*       *भगवान महावीर स्वामी* अवसर्पणी काल के अन्तिम तीर्थंकर थे और *तीर्थंकर ऋषभदेव* पहले। विश्व के प्रथम गणराज्य वैशाली के राजा सिद्धार्थ और […]

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अन्तर्मना उवाच

अन्तर्मना उवाच *समाज एक ऐसा बाजार है,* *जहाँ सलाह थोक में और सहयोग,* *ब्याज पर मिलता है..!* *आज देश का घर, परिवार, समाज, नाज़ुक दौर से गुजर रहा है।* सबकी स्थिति नाज़ुक है। समय रहते स्थिति को संभालना होगा वरना परिणाम भयंकर होगा। *     आज आदमी सम्वेदन हीन होता जा रहा है।* हिंसा, […]

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