अन्तर्मना उवाच

धर्म

अन्तर्मना उवाच

*किसी अच्छे इंसान से कोई गलती हो जाये तो सहन कर लो। क्योंकि सोना यदि कीचड़ में गिर जाये तो उसकी कीमत कम नहीं हो जाती।*

 

 

 

कभी-कभी थोड़ा सहन करना भी चाहिए। *दुनिया का हर पुरुष अपनी पत्नी में सीता, सावित्री जैसी सुशील और मृदुभाषी रूप चाहता है।* पर क्या तुमने कभी यह भी सोचा है इसके लिए तुम्हें भी राम जैसा होना पड़ेगा-?राम की मर्यादाओं को जीना पड़ेगा-? सीता जैसी पतिव्रता पत्नी चाहिए तो राम जैसा आदर्श प्रस्तुत करना पड़ेगा-?

*भारतीय संस्कृति में पत्नी महज वासना पूर्ति का साधन नहीं होती है।* प्रसाधन अपितु वह अपने पत्नी जीवन जंग के साथ धर्मपत्नी का दायित्व भी निर्वाह करती है, वह तुम्हें धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, इस मायने में पत्नी तुम्हारी मार्गदर्शक भी है। अतः तुम्हें अपनी पत्नी की भावनाओं को समझना चाहिए तथा उनका आदर करना चाहिए, वह देवी स्वरूप है।

 

 

 

 

*जब पति परमेश्वर हो सकता है..*
*तो पत्नी देवी स्वरूप क्यों नहीं हो सकती है…?*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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