अन्तर्मना उवाच
*कौन कहता है इंसान रंग नहीं बदलता–?*
*किसी के मुंह पर सच कहकर तो देखिये,*
*एक नया रंग ही सामने आयेगा..!*
*मैं लोगों से कहता हूँ –* लड़ लो, झगड़ लो, अपने को रोक न सको तो पिट–पिटा लो, मगर झगड़े के दो घड़ी बाद, घंटा भर बाद, *झगड़े को भूल जाओ*। सामने वाले से क्षमा याचना कर लो, हाथ जोड़कर *जय जिनेन्द्र* बोल लो।
बस यह झगड़ा झक मारकर नौ दो ग्यारह हो जाएगा।






*भगवान ना करे – अगर कभी घर में झगड़ा हो जाए, झगड़ा हो सकता है, जहाँ चार लोग रहें, वहाँ झगड़ा होना कोई नई बात नहीं।* घर में चार बर्तन होंगे तो थोड़ी बहुत आवाज तो होगी ही। *श्री कृष्ण* के घर में भी झगड़ा होता था, इतना बड़ा महाभारत झगड़ा नहीं तो और क्या है–? *राम जी* के घर में भी झगड़ा होता था, केकई और मंथरा के कारनामे झगड़ा नहीं तो और क्या है–? *भगवान ऋषभदेव* के घर में भी झगड़ा होता था, भरत बाहुबली का युद्ध झगड़ा नहीं तो और क्या है–? और *यदि तुम्हारे घर में झगड़ा हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं।*
*मेरी यह बात हमेशा याद रखना –* लड़ लेना, झगड़ लेना, सुना देना, सुन लेना, मगर लड़ने झगड़ने के बाद, बोल चाल बंद मत करना। अगर बोलचाल बंद हो गई तो वाकई में रगड़ा हो जाएगा। क्योंकि बोल चाल बन्द होने पर सुलह के सब दरवाजे बन्द हो जाते हैं। *बोलचाल बंद होने पर क्रोध बैर का रूप ले लेता है और वह बहुत दुखदाई होता है…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
