जैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है –एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

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जैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है –एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा किजैन दर्शन दो धर्मों की बात करता है,एक श्रावक धर्म, दूसरा मुनि धर्म..!

 

 

उन्होंने कहा की श्रावक धर्म कहता है – यदि तुम्हारे नगर में, शहर में कोई सन्त, मुनि, आचार्य संघ आये तो उनकी अगवानी करो, उनका अभिनन्दन वन्दन करो, सेवा भक्ति करो, समुचित व्यवस्था करो। उनकी आगमोक्त चर्या में सहयोगी बनो, और यदि वहाँ से, वो गमन कर रहे हों, तो सह सम्मान — प्रसन्न मन से सहज विदा करो।क्योंकि वह तुम्हारे जैसे तुम्हारे ही भाइयों को जगाने के लिये जा रहे हैं।

आचार्य श्री ने सच्चे श्रावक के विषय में बताते हुए कहा की सच्चा श्रावक वही है, जो दिगम्बरत्व के प्रति, पिच्छी – कमण्डल के प्रति, बिना भेदभाव से सेवा – भक्ति – श्रद्धा पूर्वक विनय करता है। गुणवान के प्रति आदर सत्कार से भरता है, तब ही वो श्रावक है। क्योंकि जैन धर्म में चारित्रनिष्ठ सभी त्यागी व्रती, महाव्रती, सभी आचार्य मुनि, आर्यिकायें पूज्यनीय वन्दनीय है।

उन्होंने मुनि धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि मुनि धर्म कहता है — अपने कर्तव्यों का इमानदारी से पालन करते हुये संकल्प–समर्पण और अपने लक्ष्य को सदा याद रखें। सन्त वचनों से नहीं, आचरण से प्रभावित करके, चेतना को प्रकाशित करते हैं। *

महाराज जी ने विशेष संबोधन देते हुए कहा कि आचरण ही पूज्यनीय, वन्दनीय है। सच है मित्रो – सन्त होना सौभाग्य की बात है। परन्तु सन्त के सन्तत्व का निर्वाह करना परम सौभाग्य की बात है। लेकिन अब साधु, सन्त का जीवन कम जी पाते हैं। सबके अपने अपने प्रोजेक्ट हैं, योजनाएँ हैं, कोई क्रिया काण्ड में, विधि-विधान में उलझ गये हैं। *

अब हम जैसे-साधु, सन्त (1) पब्लिक (2) पैसा (3) प्रोजेक्ट, में ही उलझ गए हैं। अब तप, त्याग, साधनाएं रोज रोज कम होती जा रही है। ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में अच्छे और सच्चे श्रावक धर्म को व्यापार जानकर, धर्म से दूर हो जायेंगे। क्योंकि साधु वह जीवित संस्था है, जिससे मरणासन समाज को जीवन दान तो मिलता ही है, साथ में – संस्कृति भी सँवरती है। *

 

 

सन्त राष्ट्र के भाग्य विधाता है। सन्त समाज के कर्णधार होते हैं। ऐसे सन्तों से ही समाज और देश की उन्नति होती है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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