106 वर्षीय श्राविका ने सुधा सागर महाराज से लिया सल्लेखना व्रत इन्होंने आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज एवं आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को ब्रह्मचर्य अवस्था में देखा था
सागर
जहां पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर
महाराज विराजित होते हैं वहा अनेक कार्य ऐसे होते हैं जो इतिहास लिख जाते हैं एवं कीर्तिमान बन जाते हैं।
ऐसा ही शनिवार की बेला में देखने को मिला जब 106 वर्षीय श्राविका ने निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 श्री सुधासागर जमहाराज के समक्ष संलेखना का का नियम लिया है। उन्हें महाराज श्री ने संस्कार करते हुए105यशोमती माताजी नामकरण किया।
विशेष बात
यह बात सभी की स्मृति में आनी चाहिए जो बहुत रोचक है और यह बहुत ही पुण्यशाली है। जी हा जिन संत ने जैन धर्म की ध्वजा को पुलकित किया है ऐसे महान दिव्य संत महाकवि आचार्य श्री108 ज्ञानसागर महाराज एवम उन्ही के द्वारा दीक्षित आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज को भी ब्रहमचारी अवस्था में देखा है।
ऐसी महान दिव्य साधिका को पूज्य मुनिश्री ने सलेखना ओर
अग्रसर करते हुए पंडाल में समस्त भक्तों की उपस्थिति में उनके संस्कार किए।
आपको बता दे पूज्य माताजी राजस्थान के अजमेर की है। और महाराज श्री की निश्रा में संलेखना हेतु भाग्योदयतीर्थ में विराजमान है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
