आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्म उन्नति के लिए अर्हम ध्यान एक महत्वपूर्ण मार्ग है प्रण्म्यसागर महाराज का प्रोफेशन द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में दिए जा रही योगदान की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की सराहना

धर्म

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्म उन्नति के लिए अर्हम ध्यान एक महत्वपूर्ण मार्ग है प्रण्म्यसागर महाराज का प्रोफेशन द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में दिए जा रही योगदान की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की सराहना
जयपुर
शनिवार की बेला में भट्टारक जी की नसियां के तोतूका सभागार में अर्हम ध्यान योग, जीएसटी, और आयकर से संबंधित सेमिनार का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

 

इस कार्यक्रम का आयोजन अर्हम ध्यान योग के प्रणेता मुनि 108 प्रणम्य सागर महाराज के सानिध्य में किया गया। मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीए प्रोफेशन द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में दिए जा रहे योगदान की सराहना की और ‘राइजिंग राजस्थान 2024’ में सीए समुदाय की सक्रिय भागीदारी का आवाहन किया। उन्होंने कहा कि सीए प्रोफेशनल्स के कार्य से न केवल सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन सुदृढ़ होता है, बल्कि आर्थिक स्थिरता में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

 

मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में जीवन में ‘अर्हम भाव’ को आत्मसात करने और जीवन मूल्यों पर बल देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्म-उन्नति के लिए अर्हम ध्यान एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

बाबूलाल जी (प्रांत प्रचारक, जयपुर आरएसएस) ने अपने उद्बोधन में मनुष्य की अपने देश, समाज और मानवता के प्रति ज़िम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा से निभाने पर बल दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति की महत्ता को संपूर्ण विश्व में फैलाने के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आवाहन किया।

 

 

मुख्य वक्ता सीए (एडवोकेट) जतिन हरजाई ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय की व्याख्या की और जीएसटी की धारा 73 और 74 के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सदस्यों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने इन धाराओं के तहत व्यापार और करदाता के अधिकारों और दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की।

सीए (डॉ.) गिरीश आहूजा ने आयकर कानून में ट्रस्ट/एनजीओ आदि से जुड़े नये बदलावों पर प्रकाश डाला और बदलते कानूनों के संदर्भ में ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने वित्तीय संस्थानों और संगठनों के लिए इन संशोधनों के प्रभाव पर भी गहन चर्चा की।

 

 

इस सेमिनार में धर्मार्थ ट्रस्टों, सोसायटी और गैर सरकारी संगठनों से संबंधित महत्वपूर्ण आयकर और वात्सल्य मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, वित्त अधिनियम 2024 में हुए हालिया संशोधनों और जीएसटी मूल्यांकन में सामने आ रहे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, जीएसटी अधिनियम में हुए नवीनतम संशोधनों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के संयोजक सीए दिनेश जैन ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *