आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शब्दों में भारत शब्द की व्याख्या भारत शब्द में ताकत है, इंडिया अर्थहीन नाम: आचार्यश्री

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शब्दों में भारत शब्द की व्याख्या भारत शब्द में ताकत है, इंडिया अर्थहीन नाम: आचार्यश्री

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मुंगावली

यह प्रवचन आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज ने मुंगावली प्रवास के दौरान दिए थे उस समय उन्होंने कहा था कि इंडिया शब्द का कोई मतलब नहीं है, यह अर्थहीन नाम है। भारतीय देश के लिए अंग्रेजी नाम का इस्तेमाल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत शब्द एक ताकत है। इसलिए इंडिया हटाओ, भारत बचाओ के लिए आप लोगों को अभियान चलाना चाहिए।

 

 

 इसके लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखें। उक्त आशय के उद्गार संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने मुंगावली में हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे थे करीब एक घंटे तक चले प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा कि भारत को इंडिया नहीं कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत नाम एक परंपरा का है, यह एक संस्कृति का नाम है। इस देश के हर व्यक्ति का दिल इस शक्ति से गूंजना चाहिए।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि भारत को इंडिया कहने वाले इसकी संस्कृति से अनभिज्ञ हैं। आचार्य श्री ने इंडिया बोलने पर कहा कि इंडिया की कुंडली ठीक नहीं, भारत की ठीक है, इस पर उन्होंने श्रवण कुमार की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि अंधे माता पिता को श्रवण कुमार कांवड़ को कंधे पर रखकर तीर्थ यात्रा करा रहे थे। यात्रा के दौरान जब वह एक गलत क्षेत्र में पहुंचे तो उनका मन बदल गया। 

 

 

 

 

माता पिता से कहा कि अब मैं तुम्हे आगे तीर्थ यात्रा नहीं करा सकता मुझे अब अपनी जिंदगी जीना है। जिस पर माता पिता ने कहा बेटा नहींं जाना है, कोई बात नही बस अकेली नदी पार करा दो, जिसके बाद श्रवण कुमार आधी नदी तक पहुंचे तो उनका मन फिर परिवर्तित हो गया और वह तत्काल माता पिता से माफी मांगने लगा। जिस पर माता पिता ने कहा बेटा इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, वह तो जगह का प्रभाव था, जिससे तुम्हारा मन परिवर्तित हो गया था।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी9929747312

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