आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर कुछ भाव भीने शब्द
जिनकी अद्भूत गौरव गरिमा
अद्भुत गौरव अनिमा महिमा
जो अवतरित हुये शरद पूर्णिमा
सदलगा ये बाल निराला
मातु श्रीमती मल्ल्पा जी का राज दुलारा
जन्मा ये सदलगा मे बाल निराला
समय का पल बढता गया बालक विद्याधर विद्यासागर हो गये
संसाररूपी तम अंधकार मे देदीप्य मान प्रकाश सा ला गये
मानो जिनधर्म की ध्वजा को जयवंत कर गये
अहिंसा करुणा शाकाहार के उदघोषक हो गये
मेरे गुरु विश्ववन्दनीय संत हो गये
कवी भी इनकी उपमा लिखते लिखते एक पुस्तक सी लिख गये
सचमुच मेरे गुरु एक महान संत हो गये

भाव अभिव्यक्ति
श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।
यह तो महा व्रत पाले है, तुमने इसको पाला है ॥
है माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ॥
श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

माँ श्रीमती है बड़भागी, आज यह किस्मत जागी ॥
मुनियो के नाथ जन्मे हैं, मनुवा हुआ बैरागी ।
शरद पूर्णिमा का चंदा, सदलगा में आया है॥,
है माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ।
श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

श्री मति माँ के अंगना मैं ठुमक चलत है लाला॥
पिता मलप्पा जग से कहे देखो ये तो बाल निराला।
पूर्व जनम के पुण्य है तब ऐसा सुख पाया है॥
है माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ।
श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।
भाव भीनी विनयांजलि सहित अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
