आज के दिन ही आचार्य श्री विद्यासागर युग का सृजन हुआ था आदर्शमति माताजी

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

आज के दिन ही आचार्य श्री विद्यासागर युग का सृजन हुआ था आदर्शमति माताजी
कुंडलपुर
तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में आदर्शमति माताजी सानिध्य में विश्व वंदनीय आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का 57 वा मुनि दीक्षा दिवस एवं आर्यिका 105 आदर्श मति माताजी का दीक्षा दिवस मनाया गया।

 

 

 

इस पावन बेला पर श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा भक्तामर महामंडल विधान, आचार्य छत्तीसी विधान किया गया एवम आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की 57 दीपों से मंगल आरती की गई।

 

इस पुनीत बेला में आर्यिका 105 आदर्शमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में आचार्य गुरुवर के विषय में कहा कि आज के दिन ही आचार्य श्री विद्यासागर युग का सृजन हुआ था। विद्यासागर युग का सृजन करने वाले गुरु नाम गुरु श्री आचार्य ज्ञान सागर महाराज, सृजन मतलब दीक्षा, दीक्षा का मतलब संकल्प। आषाढ़ सुदी पंचमी की सन 1968 में ब्रह्मचारी विद्याधर मुनि विद्यासागर बन गए थे। गुरु नाम गुरु ज्ञान सागर महाराज इनको बनाने वाले और समयसार जैसे महान ग्रंथ को जीवंत बनाने वाले, मुलाचार ग्रंथ को जीवंत बनाने वाले युगदृष्टा गुरु नाम गुरु ज्ञान सागर महाराज थे।

 

माताजी ने कहा कि आचार्य भगवान का 57 व दीक्षा समारोह है। सब कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं भी है जिसके लिए जिसके द्वारा यह धरती फूल रही थी, फल रही थी, धरती में धर्म पल्लवित हो रहा था। वो आज कहीं भी नहीं है यहां परंतु फिर भी हम कैसे भूल सकते हैं हमें भूलना भी नहीं है। आज भी आचार्य श्री जी हर दिल में विचरण कर रहे हैं। किसी ने कहा है पत्थर कट सकता है कागज फट सकता है कागज पर लिखा नाम कट सकता है पत्थर पर लिखा नाम कट सकता है लेकिन जिसके हृदय में आचार्य श्री का नाम लिखा है वह किसी भी भव में कभी नहीं मिट सकता है। वह ऐसे ही थे। वह ऐसे ही इस धरती मे रहे। वह कभी किसी को बोझ नहीं बने वह कभी किसी को भारी नहीं बने बल्कि यह जहां भी विचरण कर रहे थे वहां की धरती
फलीभूत हो जाती थी। वहां की धरती प्रसन्नता से भर जाती थी। ऐसे परम पूज्य आचार्य भगवान हम सभी के लिए बड़े बाबा के दरबार में बहुत विशेष रूप से याद आ रहे हैं। वैसे तो लगभग 5 माह पूरे होने को है आचार्य भगवन हम सबको छोड़कर चले गए।

 

माताजी ने स्मृति को सांझा करते हुए कहा कि हमें वह दृश्य याद आ रहा है जब राम को केकई ने 14 वर्ष का वनवास दिया। राम जब अयोध्या छोड़कर जा रहे थे तो अयोध्या वासियों ने राम को रोकने की कोशिश की राम नहीं रुके।

 

राम के साथ साथ पहुंचे लोगों ने सरयू तट के पास रात्रि विश्राम के लिए रुके। रात्रि व्यतीत कर वह ब्रह्म मुहूर्त में ही सबको सोता छोड़कर चले गए। ऐसे ही आचार्य श्री सबके दिल में वास करते थे सबकी आंखों में विचरण करते थे। सबके मन में छाए थे। सब सोचते थे अब आचार्य श्री का दीक्षा दिवस मनाने कहां जाएंगे। आज हर किसी का मन कहा जाए।

आचार्य श्री को कहां खोजें आचार्य श्री हमें कहां मिलेंगे हमने सोचा बड़े बाबा के दरबार में आचार्य श्री मिलेंगे। क्योंकि आचार्य श्री के 25 वे रजत महोत्सव पर हमें भी आचार्य श्री के कर कमल से पंच महाव्रत को धारण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। 32 वर्ष व्यतीत हुए। 32 वर्षों में न आचार्य श्री का सानिध्य मिला। 35 वे वर्ष में प्रवेश करते हुए बड़े बाबा तो मिले हैं लेकिन आचार्य श्री नहीं मिले। आचार्य श्री ने हर किसी को दिल खोल कर दिया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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