*आचार्य श्री विद्यासागर- इस युग के महान सन्त*जीवन झलकी
प्रमुख दिगम्बर जैन सन्त आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एक महान तपस्वी सन्त रहे! उनका जन्म शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक राज्य के बेलगांव जिले के ग्राम सदलगा में हुआ, लगभज18 वर्ष की उम्र मे ही उन्हैं वैराग्य हुआ और उन्होने अजमेर राजस्थान मे आकर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज से अद्ध्यन कर उन्हीं से मुनि दीक्षा एवं बाद मे आचार्य पद प्राप्त कीया! उनके वैराग्य का असर उनके पूरे परिवार पर पडा और धीरे धीरे उनके 3 भाइयो ने, माता, पिता ने भी मुनी दीक्षा धारण की जिसमें उनसे छोटे वर्तमान के श्री समय सागर जी महाराज थे जिनकी जन्म जयन्ती भी आज ही शरद पूर्णिमा को है और जिनको आचार्य श्री विद्यासागर जी की डोंगणगण ( छत्तीसगढ) में इसी वर्ष समाधी के बाद कुन्डलपुर मे एक विशाल समारोह में संघ का नवाचार्य बनाया गया है! आचार्य श्री ने लगभग 55 वर्ष का मुनी जीवन अधिकतर मध्य प्रदेश राज्य व थोडा बहुत गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ में बिताया! अपने जीवन काल मे उन्होंने लगभग 500 मुनि व आर्यिकाओं को दीक्षा दी व लगभग 800 बाल ब्रह्मचारी बनाये!
उन्होने अपने जीवन मे सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह के मार्ग पर चलते हुए निम्न योजनाओं पर महत्वपूर्ण कार्य कीया-
1.अंग्रेजी नही हिन्दी को महत्व दो पर देश वासी मुहीम चलाई
2.भारत को India नहीं भारत बोलो की उनकी मुहीम को वर्तमान सरकार का पूर्ण समर्थन रहा!

3 जीवदया के लिए उनकी प्रेरणा से देश भर मे सैंकडों गौशालाये खोली गयीं हैं! वे मांस निर्यात के सदा विरोधी रहे और सरकारों से इस आमदनी का लालच छोडने हेतु सदैव दवाव बनाते रहे!
4.राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से वे सदैव प्रभावित रहे इसीलिए उनकी प्रेरणा से भारत की प्रमुख जेलों में कैदियों के पुनर्वास के लिए समाज के सहयोग से हधकरघा के लूम लगवाये गये हैं, जिसके लिये उनसे ही दिक्षीत ब्रहमचारी इन लूमो की देखभाल करते हुए श्रमदान जैसी अनेक ब्रांड बनाकर हधकरघा वस्त्र को मूलधारा से जोडने का व रोजगार देने का प्रयास कर रहे हैं!
5.आज जो हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी का जो नारा है कि बेटी पडाओ बेटी बचाओ, को सही मायने मे जीवन्त किया तो आचार्य श्री ने , उन्होने बेटियों के लिए अच्छी शिक्षा, उच्च चारित्र एवं सुरक्षा देने के लिए भारत भर मे अनेक “प्रतिभास्थली” नाम के संस्थानो का निर्माण करवाया जिसमे आज सैंकडो बेटीयां पड कर अपना जीवन संभाल रहीं हैं!
6.उनका मानना था कि जैन व हिन्दू शास्त्रो मे वर्णित आर्युवैद से बढिया उपचार विधी कोई और नहीं इसीलिए उन्होने जबलपुर में “पूर्णआयू” नाम का आर्युवैदिक मैडिकल कालेज के निर्माण की प्रेरणा दे प्रारम्भ कराया, जिसमे आज सैंकडो विद्धार्थी अपनी प्राचीन स्वास्थ्य पद्धति को पड रहे हैं व हजारों मरीज उनके इलाज से ठीक भी हो रहे हैं! वहीं उन्हीं की प्रेरणा से सागर मे भाग्योदय के नाम से ( मल्टी स्पैशिलिटी हौस्पीटल) का शानदार संचालन चल रहा हे!
7.उनके द्वारा अनेक साहित्य की रचना की गयी, जिसमे से एक रचना मूकमाटी पर तो अब तक अनेको लोगो ने शोध कर PHD हासिल की है व यह व उनकी लिखी अनेक पुस्तक भारत के अनेक विश्विद्यालय के कोर्स मे पढाई जातीं हैं!
8.उन्होने अपने जीवन काल मे अनेक मन्दिर, तीर्थक्षेत्रो का उद्धार, नव निर्माण करवाया जिसमे मध्य प्रदेश मे दमोह जिले मे कुन्डलपुर तीर्थ छेत्र मे नव निर्मित बडे बाबा का लाल पत्थर का मन्दिर प्रमुख है! यह अयोध्या मे बने राममन्दिर से लगभग तिगुना बडा है व उसी शैली मे बना शानदार दर्शनीय मन्दिर है!
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरुदेव ज्ञानसागर जी ने अपने शिष्य से संघ को एक गुरुकुल की भांति चलाने का आदेश दीया था, सो उन्होने एसा किया भी, वे आज स्वयं तो हमारे बीच नहीं हैं परन्तु उनके बनाये हुए सैंकडो गुरुकुल के साधु साध्वी उन्हैं आज भी जीवन्त कीये हुए हैं!
मनोज कुमार जैन बांकलीवाल
