आचार्य श्री ने आचार्य कुंदकुंद की परंपरा को जीवित रखा है विमल सागरमहाराज

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

आचार्य श्री ने आचार्य कुंदकुंद की परंपरा को जीवित रखा है विमल सागरमहाराज
खुरई
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का 57 वा दीक्षा दिवस मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में मनाया गया। इस अवसर पर श्रीजी का अभिषेक पूजन किया गया मुनिसंघ को शास्त्र भेट किए गए। इसके साथ ही 57 दीपक से आचार्य गुरुवर की मंगल आरती की गई इसी के साथ पौधारोपण, निर्धनों को भोजन, औषधि, वस्त्रदान एवम मिष्ठान वितरित किए गए।

 

 

इस अवसर पर पूज्य मुनिश्री विमलसागर महाराज ने कहा की आचार्य श्री ने आचार्य कुंदकुंद की परंपरा को जीवित रखा है। उनके गुरु ने एक महान शिष्य को दीक्षा दी। जो सबके हृदय में विराजमान है। लोग विवाह की तैयारी करते है, दूल्हा बनने के लिए तैयार रहते है लेकिन आचार्य श्री मुनि दीक्षा के लिए तैयार हुए थे, विश्व का चमत्कार था उनकी मुनि दीक्षा महाकवि आचार्य ज्ञानसागर महाराज कहते थे कि विद्यासागर चतुर्थ कालीन चर्या के धनी है, वह बड़ी बड़ी आपत्तियो को कष्टों को सहन करते रहे। गुरुदेव ने सबकी भलाई के बारे में सोचा था, वह आनंद धाम सोप कर गए है। जिसने निर्दोष मंदिर बनवाए है, उसने जिनशासन को स्थापित किया है। गुरु ने जहा चरण रखे वह अतिशय क्षेत्र बन गया। आनंद धाम सकारात्मक ऊर्जा वाला क्षेत्र है।

इस अवसर पर मुनिश्री अनंत सागर महाराज ने कहा की वीतरागता के रंग में रंगने वाले बिरले लोग होते है,आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने उन्हे अपने रंग में रंगा, वह आगम के अनुरूप चर्या कठोर साधना करते थे। उनकी विदेशो में भी प्रसिद्धि थी।

 

 

 

 

आचार्य श्री ने मुनि दीक्षा को लेकर इस धरती को धन्य किया भावसागर महाराज
इस अवसर पर मुनिश्री भावसागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री ने मुनि दीक्षा को लेकर इस धरती को धन्य किया, उनका जन्म होने के बाद देश आजाद हुआ था, आचार्य श्री आध्यात्म सूर्य के ऐसे वक्ता है, जिन्होने अपने कृतित्व से साधुता को सार्थक करते हुए भारतीय संस्कृति की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा है।

आचार्य श्री के आगे शब्द गौण हो जाते थे, यह आत्मा के, आध्यात्म के, करुणा के पर्यावरण के शिल्पी थे, दया मूर्ति थे। उन्होंने स्वर्ण अक्षरों में लिखने योग्य कार्य किए है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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