आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज कोई कहता तुमको दिगम्बर, कोई कहता पैगम्बर

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज कोई कहता तुमको दिगम्बर, कोई कहता पैगम्बर भू देखा,भूमंडल देखा मेने नदी सरोवर देखा पर्वत की चोटी पर जाकर, जाने कहां कहां नहीं देखा। लेकिन जबसे देखा तुमको, तबसे मुझको लागा ऐसा जेसे मेने चलते फिरते, वर्तमान महावीर को देखा नहीं जानता कौन हो गुरुवर, और कहा से आए हो मेरे […]

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अल्फाज में आगम को मुखरते देखा

    उनके अल्फाज में आगम को मुखरते देखा उनके होठों से समयसार को झरते देंखा वो कुंद कुंद की वाणी के*गुरुवर गणधर ये विधा सागर वही जो कभी थे विधाधर जब से रखा है ये सर उनके पाक कदमो पर संवर गई मेरी तकदीर उनकी रहमत पर सन्त शिरोमणि गुरुदेव की जय जय हो […]

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बेटियां

बेटियां तुम विश्वास हो पिता का तुम आत्म सम्मान हो मां का पापा की आंखों का तारा मां की ममता की छाया कभी पिता के विश्वास को नहीं तोड़ना ना कभी माता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना कभी गलत कदम ना उठाना फूक फूक कर कदम रखना कुछ ऐसा कार्य ना करना अन्य बेटियों को […]

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वसुधैव कुटुंब

हम छोटी छोटी बातों पर उलझ जातें है और कभी-कभी तो इसके कूट दुष्परिणाम भी आते है इसी को लक्ष्य कर देखिए आज की रचना हमारी कुछ इस तरह सादर—‘ वसुधैव कुटुंब एक एक मिल दो बनते है दो दो मिल फिर चार चार मिले फिर एक यदि तो पंच समाज श्रेष्ठ आधार पंचों से […]

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गणिनी गुरु माँ विशुद्धमती माताजी के चरणों मे रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’जयपुर केे उदगार

गणिनी गुरु माँ विशुद्धमती माताजी के चरणों मे रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’जयपुर केे उदगार क्या खूब पंक्तिया                                                                   लोग कहते है पैसा जमा रखों बुरे […]

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कल्पना छोडकर राह श्रम की चुनोती

कल्पना छोड़कर राह श्रम की चुनोती तुमको मंजिल हकीकत की मिल जाएगी बाहें फैला के सागर सा विस्तार दो , एक दिन हर नदी आकर मिल जाएगी। आज मिलके सभी प्रेम को जान ले, जो युगों तक अबूझी पहेली रहा, मीरा की साधना, राधा की कामना , द्रौपदी की जो निश्छल सहेली रहा, शिव सी […]

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पंडित जवाहरलाल नेहरू पुण्यतिथि पर नमन

आज देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्य तिथि है हम सभी जानते है उन्हें गुलाब कितना पसंद था और हमे जब हम छोटे थे हमे एक कविता याद रहा करती थी और सुनाई जाती थी जिसे कवि बालस्वरूप राही ने लिखा है वह कविता है ओ चाचा नेहरू के गुलाब, तुम कितने […]

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गोरव का अंश गोरांशी

गोरव का अंश गोरांशी जो है गोरव का अंश वह है गोरांशी कोई कहता यह रामगंजमंडी की बेटी,कोई कहता अशोक नगर की बेटी मै कहता हु यह देश की बेटी अपने सपनो को खुद चुनती, एक इबारत लिखती सचमुच गोरांशी तुमने एक नए इतिहास की रचना कर दी पदक लाकर भारत का नाम करती नेक […]

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वक्त

वक्त क्षणभंगुर सा होता है घड़ी से गुज़रता हुआ हर एक लम्हा, कितनी हसरतें चाहतें पालते हैं हम इन आँखों में, कहाँ ठहरते हैं पलछिन भागते हैं बेमुरव्वत हरदिन, ख्वाहिशें दबी-दबी सी रहती है दिल के किसी अंधेरे में, रोशनी की राह तकती हैं वक्त की फिसलती सहमती किरणें, एक अस्तित्व एक जान हज़ार ख्वाब […]

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माँ तो आखिर माँ होती है

माँ तो आखिर माँ होती है हर मुस्कान मै जिसके चिंता होती है हर बात मै फ्रिक बच्चो की होती है डांटती है पर बेइंतहा प्यार देती है माँ तो आखिर माँ होती है जिसकी ममता है निस्वार्थ और निश्छल सब कुछ देकर भी कुछ ना पाने की चाह अपने बच्चो की ख़ुशी मै खुश […]

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