बेटियां तुम विश्वास हो पिता का
तुम आत्म सम्मान हो मां का
पापा की आंखों का तारा
मां की ममता की छाया
कभी पिता के विश्वास को नहीं तोड़ना ना कभी माता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना
कभी गलत कदम ना उठाना
फूक फूक कर कदम रखना
कुछ ऐसा कार्य ना करना
अन्य बेटियों को पढ़ने का
अवसर ना मिले
बेटियां तुम परिवार का गौरव हो
तुम समाज की धरोहर हो
राष्ट्र का सम्मान हो ब्रह्मांड की अद्वितीय कृती हो तुम
कनक नंदी की प्रिय
आत्मा से परमात्मा बनने वाली
विजया की प्यारी-प्यारी बेटियां
लेखक। विजय लक्ष्मी
