माँ तो आखिर माँ होती है

काव्य रचना

माँ तो आखिर माँ होती है

विकास सेठिया रामगंजमडी

हर मुस्कान मै जिसके चिंता होती है
हर बात मै फ्रिक बच्चो की होती है
डांटती है पर बेइंतहा प्यार देती है
माँ तो आखिर माँ होती है

जिसकी ममता है निस्वार्थ और निश्छल
सब कुछ देकर भी कुछ ना पाने की चाह
अपने बच्चो की ख़ुशी मै खुश होती है
माँ तो आखिर माँ होती हैं

चाहे ना सोए वो रातो मै
पर हमें चैन से सुलाती है
घर परिवार और रसोई मै ही
अपना समय बिताती है
ना ख्वाहिश ना इच्छा
ना शिकायत कभी होती है
माँ तो आखिर माँ होती है

पास ना हो उसके हम तो
इंतजार मै समय बिताती है
खुद से ज़्यादा अक्सर

हमारी परवाह करती है
डांट प्यार गुस्सा मोह ममता
सब रंग दिखलाती है
अपने बच्चो के आगे वो कहा कुछ देख पाती है
ये माँ है जनाब
पर माँ तो ऐसी ही होती है।
विकास सेठिया रामगंजमडी

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