दूसरे के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का भाव उत्पन्न होना और उसको दूर करने के लिए तत्पर हो जाना ही सक्रिय सम्यक दर्शन है संभव सागर महाराज
दूसरे के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का भाव उत्पन्न होना और उसको दूर करने के लिए तत्पर हो जाना ही सक्रिय सम्यक दर्शन है संभव सागर महाराज विदिशा “जय गुरुदेवा और जय आयुर्वेदा”- मुनि श्री सम्भवसागर “दूसरों के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का […]
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