कामना वासना और इच्छा अभिलाषा के रहते हुए प्राण चले जाएं तो वह मृत्यु है और प्राण रहते हुए कामना वासना इच्छा अभिलाष निकल जाए वह मुक्ति है प्रसन्न सागर महाराज 

धर्म

कामना वासना और इच्छा अभिलाषा के रहते हुए प्राण चले जाएं तो वह मृत्यु है और प्राण रहते हुए कामना वासना इच्छा अभिलाष निकल जाए वह मुक्ति है प्रसन्न सागर महाराज 

 

औरंगाबाद गुड़गांव हरियाणा 

अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा गुलाबी नगरी जयपुर राजस्थान की और चल रही है।

 

उन्होंने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि मैं देख रहा हूं – आज जितनी सुख सुविधा मिल रही है, आदमी उतना ही ज्यादा दु:खी परेशान नजर आ रहा है। जबकि अतीत में इतनी सुख सुविधाएं नहीं थी, फिर भी लोग सुख शान्ति आनंद प्रेम का जीवन जीकर मुस्कुरा रहे थे और आज सब कुछ होते हुए भी आदमी तनाव ग्रस्त होकर जीवन जी रहा है। इसका एक ही कारण है – जो है पर्याप्त है, उसका सुख नहीं भोग रहे हैं, बल्कि जो नहीं मिला है उसके दुःख में आदमी मरा जा रहा है। समझदारी इसी में है जो प्राप्त है, उसका आनंद लो और समय का सदुपयोग करो।

 

 

 

 

आज सब कुछ होने के बाद भी आदमी चिन्तित, परेशान नजर आ रहा है। जितने भौतिक सुख संसाधन बढ़ रहे हैं, उतनी ही परेशानियां बढ़ती नजर आ रही है। समभाव, सन्तोष, सदुपयोग से हर वस्तु सुख दे सकती है अन्यथा मिली हुई भौतिक सुख सुविधाओं के दुरूपयोग से आदमी जीते जी मर रहा है। क्योंकि मन की असन्तुष्टी, ना जीने देती है ना मरने। इन दिनों वस्तुओं का अभाव नहीं बल्कि उसका दुरूपयोग ही घर परिवार की स्थिति को नेटवर्क के बाहर ले जा रही है।

 

 

 

 

सौ बात की एक बात_ –

परमात्मा ने हमें हमारी औक़ात से ज्यादा दे दिया है। इसलिए हम अनीति, अन्याय, उदण्डता का मार्ग अपना रहै हैं और गा रहे हैं – मैं का करू राम मुझे कर्मों ने घेरा…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *