दूसरे के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का भाव उत्पन्न होना और उसको दूर करने के लिए तत्पर हो जाना ही सक्रिय सम्यक दर्शन है संभव सागर महाराज

धर्म

दूसरे के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का भाव उत्पन्न होना और उसको दूर करने के लिए तत्पर हो जाना ही सक्रिय सम्यक दर्शन है संभव सागर महाराज
विदिशा
“जय गुरुदेवा और जय आयुर्वेदा”- मुनि श्री सम्भवसागर “दूसरों के दुख या पीड़ा को देखकर हृदय में करुणा या दया का भाव उत्पन्न होंना और उसको दूर करने के लिये तत्पर हो जाना ही सक्रिय सम्यक् दर्शन है” उपरोक्त उदगार -मुनि श्री सम्भव सागर महाराज ने प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किये।

विदिशा के स्वर्णप्राशन कार्य की महाराज श्री ने की प्रशंसा
महाराज श्री ने विदिशा में हुए”स्वर्णप्राशन” के कार्य की प्रशंसा करते हुये कहा कि आप लोगों ने यह कार्य निरपेक्ष भाव से किया है और यही सक्रिय सम्यक् दर्शन है” उन्होंने नगर की सभी महिलामंडलों एवं समग्र पाठशालाओं एवं मुनि सेवक संघ के कार्यकर्ताओं को विशेष आशीर्वाद देते हुये कहा कि स्वर्णप्राशन पिलाने में महिला कार्यकर्ताओं में जो जोश और उत्साह था कि आप लोगों ने अपने भोजन की भी परवाह नही की और लगातार सेवा के इस पवित्र कार्य में अपनी सेवाएं देते रहे, उसी का परिणाम है कि हमारा लक्ष्य पचास हजार का था हम उससे कही ऊपर निकल गये हमने सुना कि सभी केन्द्रों पर सभी समुदाय के बच्चे अपने परिजनों के साथ आये।

 

 

आचार्य विद्यासागर महाराज जैन समाज के संत नहीं वह जन-जन के संत थे
महाराज श्री ने आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के विषय में बोलते हुए कहा कि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी अकेले जैन समाज के ही संत नहीं थे वह जन जन के संत थे। उन्होंने कहा कि यह परम पूज्य गुरूदेव के 2008 का ही आशीर्वाद तथा उनकी ही वर्गणाओं का प्रतिफल था जो कि जीरो से सोलह साल तक के सभी बच्चों को आशीर्वाद के रुप में स्वर्णप्राशन मिला मुनि श्री ने कहा गुरुदेव हमेशा भारतीय चिकित्सा प्रणाली की प्रशंसा किया करते थे वह कहते थे कि आयुर्वेद में सिर्फ गुण ही गुण है उसमें कोई अवगुण नहीं, इसलिये सभी को जय गुरुदेवा और जय आयुर्वेदा अपनाना चाहिये।

 

 

 


उन्होंने सक्रिय सम्यक् दर्शन के आठ अंगों का वर्णन करते हुये कहा कि प्रथम चार अंग धर्मध्यान और स्वाध्याय के विषय है,लेकिन आगे के चार अंग जैसे वात्सल्य, उपगूहन, स्थितिकरण तथा प्रभावना अंग तो आपके प्रक्टिकल करने के ही अंग है और यही प्रक्टिकल सक्रिय सम्यक दर्शन है,जो कि आप लोगों ने खासकर महिलामंडलों ने करके दिखाया उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के प्रति वात्सल्य तो सभी दिखाते है लेकिन आप लोगों ने दूसरों के बच्चों के स्वास्थ के प्रति उत्साह और वात्सल्य दिखलाया है वह संपूर्ण भारत की जैन समाज के लिये अनुकरणीय है,उन्होंने कहा कि नगर नगर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहना चाहिये ।

 

उन्होंने कहा किआचार्य गुरुदेव की स्मृति को घर घर में पहुंचाने का जो कार्य आप लोगों ने किया है उसके लिये सभी कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद है।प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि कुछ बच्चे जो छूट गये थे उन सभी बच्चों को स्वर्णप्राशन आज भी श्री शांतिनाथ दि. जैन मंदिर में पिलाया गया। श्री शीतल विहार न्यास कमेटी ने त्रिदिवसीय कार्यक्रम जो कि आगामी 15जनवरी से 17 जनवरी तक भगवान शीतलनाथ स्वामी का जन्मकल्याणक एवं भगवान आदिनाथ स्वामी का मोक्षकल्याणक कार्यक्रम हेतु श्री फल अर्पित किये जिसकी स्वीकृति मुनि संघ ने दी तथा आमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया।

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि विदिशा मध्यप्रदेश में भगवान शीतलनाथ की एकमात्र जन्मभूमि है अतः इसे पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाना चाहिये तथा भगवान आदिनाथ स्वामी तो आपके इष्टदेव है,जब भी कोई शुभ कार्य होता है या कोई अशुभ घटना घट जाती है तो आप उन संकटों की घड़ी में आपके कष्टों को हरने वाले है अतः 15-16-17 जनवरी तीनों दिवस धूमधाम और सक्रियता के साथ मनाना चाहिये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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