जीवन के अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक ही दूर कर सकता है – मुनि आदित्य सागर श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश,
बिजयनगर
पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्धसागर महाराज के शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री 108आदित्य सागर महाराज ने कहा कि ज्ञान ही आत्मा का वास्तविक प्रकाश है।
बिना ज्ञान के किया गया धर्म आडंबर बन जाता है, जबकि ज्ञानयुक्त धर्म मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है। वे नगर में मंगलप्रवेश के पश्चात शांतिनाथ जिनालय में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा धन वैभव और पद क्षणिक हैं, परंतु ज्ञान शाश्वत है।

जीवन के अंधकार को केवल ज्ञान रूपी दीपक ही दूर कर सकता है। मुनि श्री ने कहा सम्यक् ज्ञान से ही व्यक्तिसही-गलत का विवेक कर पाता है। ज्ञान से विनय, विनय से पात्रता और पात्रता से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने प्रत्येक श्रावक-श्राविका से आह्वान किया कि वे केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि शास्त्रों के अध्ययन द्वारा ज्ञानार्जन अवश्य करने में रूचि रखे।
मंगल प्रवेश से पूर्व आदित्य सागर जी महाराज का ससंघ जयघोष के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण जयकारों एवं भक्ति भाव से मुनि श्री ससंघ की अगवानी की। बाद में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों के साथ 27 मील चौराहे से, प्राज्ञ महाविद्यालय होते हुए श्री शांतिनाथ जिनालय मंदिर लाया गया।
महाराज श्री का भीलवाड़ा की और हो रहा है मंगल विहार
परम पूज्य गुरुदेव श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्य सागर महाराज का मंगल विहार भीलवाडा की और हो रहा है।दिनांक 09/1/26 को शाम 4:00 बजे लांबिया टोल नाके के पास, पाटोदी फार्म हाउस पहुंचेंगे। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312








