श्री पाल मेना सुन्दरी,राग से वैराग्य की ओर, नेमी राजुल नाटक का मंचन आयोजित किया सिद्धों की पूजा आराधना से बढ़कर कोई दूसरी औषधि नहीं है। आचार्य वर्धमान सागर जी
निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज संध के सानिध्य में सन्त निवास नसिंया जैन मंदिर पर सिद्ध चक्र मण्डल विधान के तहत श्रीपाल मेना सुन्दरी, एवं राग से वेराग्य की ओर नेमी राजुल नाटक का मंचन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओ ने कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्यार्जन किया। जैन समाज के मीडिया प्रभारी विमल जौंला सुनील भाणजा एवं राकेश संधी ने बताया कि आचार्य श्री के शीतकालीन प्रवास के चलते नसिंया जैन मंदिर में चल रहे दस दिवसीय सिद्ध चक्र मण्डल विधान के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक नाटिका श्री पाल मेना सुन्दरी, राग से वैराग्य की ओर नेमी राजुल नाटक का मंचन बहुत ही भव्य किरदार के साथ दिखाया गया
जिसमें निशांत एण्ड पार्टी नाट्य कला मण्डल दिल्ली एवं संगीतकार केशव एण्ड पार्टी भोपाल द्वारा राजसी वेशभूषा में सुसज्जित किरदार निभाया एवं भगवान नेमीनाथ बनें सुकुमाल जैन और राजुल मति नीलम चंवरिया एवं माता कमलेश देवी और पिता बने सन्मति जैन द्वारा वैराग्य का मंचन दिखाया गया।

मीडिया प्रभारी विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि नाटिका के शुभारंभ से पूर्व सर्व प्रथम सन्मति कुमार सुकुमाल जैन महिपाल जैन एवं मोहित जैन नीलम जैन शालू जैन आयुषी जैन चंवरिया परिवार ने दीप प्रज्वलित कर मंगलाचरण किया।
प्रवक्ता विमल जौंला राकेश संधी एवं सुनील भाणजा ने बताया कि चंवरिया परिवार द्वारा उक्त कार्यक्रम में भगवान नेमी कुमार की गाजेबाजे के साथ बारात निकाली गई। जिसमें गाजे बाजे लवाजमे के साथ नेमी कुमार की बिन्दौरी मंदिर के मुख्य गेट से पांडाल कार्यक्रम स्थल होते हुए मंच तक निकाली गई, बिन्दौरी मे समाज के सभी श्रद्धालु एवं महिलाओं ने राजस्थानी परम्परा अनुसार नाचते गाते हुए शामिल होकर पुण्य लाभ लिया।
बिन्दौरी का मंच तक पहुंचने पर समाजसेवी महावीर प्रसाद पराणा हुकमचंद जैन प्रेस वाले रमेश चंद गिन्दोडी़ जितेन्द्र चंवरिया गोपाल कठमाणा सुशील नीरा जैन पदमचंद टोंग्या बाबूलाल शाह सुशील गिन्दोडी़ दिनेश चंवरिया पवन बोहरा महेन्द्र चंवरिया सुनील गिन्दोडी़ त्रिलोक सिरस शंभु कठमाणा मुकेश बनेठा चेतन चंवरिया त्रिलोक रजवास ज्ञानचंद चंवरिया अर्पित लटुरिया चिराग टोंग्या सुनील सर्राफ विनोद जैन सर्राफ नवरत्न टोंग्या संजय प्रेस रवि भाणजा पदम सेदरिया पारसमल जैन विमल सोगानी सहित अनेक लोगो ने अगुवानी की।
उन्होंने बताया कि विधान में गुरुवार को विधानाचार्य पण्डित मुकेश शास्त्री विनम्र के निर्देशन में सौधर्म इन्द्र परिवार के साथ सभी इन्द्र इन्द्राणियो ने 64 श्री फल चडा़कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान निवाई में विराजमान आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज के दर्शनार्थ आये साईबर इन्वेस्टिगेशन आदिश गंगवाल टोंक एवं धर्म जाग्रति संस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष पदमचंद बिलाला एवं सोभागमल अजमेरा जयपुर ने अपने 40 सदस्यों के साथ श्री फल चडा़कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सिद्ध चक्र मण्डल विधान की पूजा अपने भव का अंत कराने वाली पूजा है। इस लोक में आठ दिवसीय विधानों का अगर कोई राजा है तो वह है सिद्ध चक्र मण्डल विधान। उन्नीसवीं शताब्दी में भटटारक शुभचंद्र द्वारा संस्कृत भाषामय सिद्ध चक्र विधान की रचना हुई। आचार्य श्री ने कहा कि जो मन वचन और काय की पवित्रता से सच्चे मन से भगवान की पूजा करते है भक्ति करते हैं उनके कार्य उनकी भावनाएं सहज ही पूर्ण हो जाती है। वीतरागी सर्व दोष मुक्त भगवान किसी का भला बुरा नहीं करते हैं। निस्वार्थ भाव भक्ति से जो पुण्य का संचय होता है उससे हमारे कार्य अपने आप सिद्ध होते हैं। उन्होंने चिंतन व्यक्त करते हुए बताया कि जिस समय मेना सुन्दरी ने सिद्ध चक्र का पाठ रचाया क्या उस समय सिद्ध भगवान कष्ट मिटाने इस वसुंधरा पर आये। इन सबके पीछे कारण था उनकी अंतरंग की अगाड़ श्रद्धा एवं अटूट विश्वास आस्था। आचार्य श्री ने कहा कि सिद्धों की पूजा आराधना से बढ़कर कोई दूसरी औषधि नहीं है। इस दौरान जैन मुनि हितेंद्र सागर महाराज ने भी धर्म सभा को संबोधित किया एवं गुरूवार को मुनि हितेंद्र सागर महाराज के मुखारविंद से वृहद शांतिधारा की गई जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






