निर्वाण भूमि सम्मेद शिखर पर रोपवे निर्माण के विरोध में डोली मजदूर सड़क पर उतरे
पारसनाथ
निर्वाण भूमि शाश्वत तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर के पर्वत पर रोपवे निर्माण को करने को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार के दल द्वारा पवित्र तीर्थ पारसनाथ पर्वत का चयन किया जा चुका है।
इसकी जैसे ही सूचना प्रसारित हुई है उसके बाद शनिवार को इसका कार्य विरोध शुरू हो चुका है एवं डोली एवं गोदी मजदूर शनिवार को सड़क पर उतरे।मजदूरो ने रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा है कि इस पर्वत पर रोपवे का निर्माण नहीं होने देंगे। इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी समुदाय की धार्मिक एवं सामाजिक संस्था सांवता सुसुर बेसी द्वारा आयोजित विरोधी रैली में अधिक से अधिक डोली एवम गोदी मजदूरों के साथ अन्य मजदूर वर्ग भी शामिल हुए। दिन की रोजी-रोटी एवं रोजगार इस पारसनाथ पर्वत के द्वारा ही होता है।


दोपहर की बेला में यह सभी मजदूर रैली निकालते हुए मधुबन के प्रमुख मार्ग से निकलते हुए हटिया मैदान पहुंचे, जहां एक आम सभा हुई। बोलते हुए वक्ताओ ने पर्वत पर हो रहे रोपवे निर्माण का मुखर होकर विरोध किया। स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाया गया और कहां गया कि जब राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध होने के बाद भी धडेले से दुपहिया वाहनों का परिचालन पर्वत के ऊपर करके डोली मजदूरों की रोजगार के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन्होंने विरोध करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि रोपवे और दो पहिया वाहनों के परिचालन पर यदि कार्रवाई नहीं की जाती है तो। संस्था आगे बड़े आंदोलन को विवश होगी।

आदिवासी समुदाय की संस्था के पदाधिकारी ने मुखर होकर कहा कि पारसनाथ पर्वत आदिवासी समाज के लिए भी आस्था का केंद्र बिंदु है। इस पर्वत की पवित्रता के लिए आदिवासी समाज सदा आगे रहा है। मरांग बुरू के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ आदिवासी समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।वही जैन समाज के संगठनों द्वारा भी इस रोपवे पर निर्माण का विरोध किया जा रहा है। संपूर्ण भारतवर्ष में भी इसके निर्माण का विरोध शुरू हो चुका है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
