हमारी कलम में इतनी ताकत नहीं जो जो दर्शन को लिख सके विज्ञमति माताजी 

धर्म

हमारी कलम में इतनी ताकत नहीं जो जो दर्शन को लिख सके विज्ञमति माताजी 

कोटा परम पूजनीय गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी संघ सहित तलवंडी दिगंबर जैन मंदिर कोटा में विराजमान है।

 

शुक्रवार की प्रातः बेला में धर्म सभा की शुरुआत समाज के श्रेष्ठिजन के साथ बाहर से पधारे हुए व्यक्तियों द्वारा श्री जी के चित्र एवं पूर्वाचार्य के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन कर की गई। इसी के साथ माताजी के कर कमलो में शास्त्र भेंट किए गए।इस अवसर पर धर्म सभा में पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन की शुरुआत जिनवाणी वंदना से की। 

 

माताजी ने जिनवाणी के विषय में कहा कि जिनवाणी का बहुत विस्तृत वर्णन है हमारे कलम और तुम्हारी कलम में इतनी ताकत नहीं है जो जैन दर्शन को समझ सके लिख सके इसी के साथ उन्होंने कहा कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गुरु चरणों में एवं जिनवाणी के चरणों में जाना होगा इस चेतन आत्मा के भटकने कारण कोई और नहीं तेरी करनी का फल है, जो तुम्हें भटकाता है। यदि भटकने से बचना चाहते हैं तो कर्मों से छुटकारा पाना होगा। और इसको जानना होगा उन्होंने कहा कि जैन दर्शन कहता है कि मंत्र तंत्र कोई कार्यकारी नहीं होते जब आपका पुण्य होगा तभी कार्यकारी होंगे। उन्होंने ज्ञानावरणीय कर्म के विषय में बताया कि हमारा ज्ञान का क्षयोपशम इसीलिए नहीं हो रहा है क्यों कि हम जिनवाणी को पढ़ते समय वाक्य को शुद्ध रूप से नहीं पढ़ते जब तक हमारा जिनवाणी के प्रति श्रद्धान नहीं होगा तब तक ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय नहीं होगा।

 

 

इसके बंध का कारण बताते हुए गुरु मां ने कहा कि इसका कारण है कि हम हर समय दूसरों की बुराई करते रहते हैं दूसरे के दोषों को देखते हैं, यदि हम दूसरों के दोषों को देखते हैं तो नीच गोत्र का बंध करते हैं। उन्होंने कहा मात्र गाथाओं को रटने से ज्ञान नहीं होता उन्हें आत्मसात भी करना होगा।

    धर्मसभा का संचालन राजकुमार लुहाड़िया ने किया 

         अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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