तीर्थंकर बालक जन्म से अनंत बल,ज्ञान अनेक गुणों के धारी होते हैं गर्भ कल्याणक से पंच कल्याणक प्रारंभआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

तीर्थंकर बालक जन्म से अनंत बल,ज्ञान अनेक गुणों के धारी होते हैं गर्भ कल्याणक से पंच कल्याणक प्रारंभ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी।
पारसोला। 
श्री पार्श्व नाथ जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 4 मार्च से पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुई आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में बताया कि।
पारसोला समाज गुरु भक्ति और भगवान की भक्ति में पीछे नहीं है विगत दिनों से हम देख रहे हैं पारसनाथ मंदिर में अभिषेक शांति धारा में काफी अभिषेक करने वालों की भीड़ रहती है भगवान पारसनाथ का जीवन चरित्र संदेश देता है कि बैर और उपसर्ग का उत्तर धैर्य और सहनशीलता से देना चाहिए। आपकी भक्ति मंगलकारी हो देव शास्त्र गुरु की भक्ति से घर हरा भरा रहता है ।आज से मांगलिक कार्यक्रम गर्भकल्याणक से प्रारंभ हुआ है भगवान का अतिशय है कि एक दिन पूर्व तेज वर्षा कीचड़ की प्राकृतिक आपदा भी दूर हो गई है। प्रतिष्ठाचार्य,आचार्य संघ और समाज सभी एक दूसरे से परिचित हैं आपने 17 वर्षों से संघ की प्रतीक्षा कर धैर्य रखा जो गुरु भक्ति रखते हैं उनके सब कार्य और मनोरथ पूरे होते हैं भगवान की भक्ति के साथ प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद का शताब्दी महोत्सव तन मन और धन से सहयोग देकर मनाने की प्रेरणा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी। यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गर्भकल्याणक के प्रथम दिवस पंडाल में धर्म सभा में व्यक्त की ब्रह्मचारी गज्जू भैया ,राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि भगवान श्री पार्श्वनाथ के समवशरण की प्रेरणा तपस्वी मुनि श्री वीर सागर जी महाराज ने वर्ष 1990 में हमारे चातुर्मास के बाद दी थी । पारसोला समाज ने गुरु भक्ति से प्रेरणा और भक्ति से समवशरण की रचना प्रारंभ की समवशरण में तीर्थंकर भगवान केवल ज्ञान होने पर 5 लाख योजन ऊपर आकाश में चले जाते हैं सोधर्म इंद्र समवशरण की रचना करता है समवशरण में 20000 सीढ़ी होती है 12 खंड के समवशरण में देव, मनुष्य, और तिर्यंच गति मुनिराज साधु आर्यिका के के पृथक खंड होते हैं पारसोला नगर में दूसरा समवशरण का पंच कल्याणक हो रहा है। पहले महावीर चेत्रालय में दीक्षा गुरु आचार्य धर्मासागर जी महाराज ने समवशरण का पंचकल्याण कराया था अब दूसरा पंचकल्याणक संघ सानिध्य में हो रहा है। केवल ज्ञान प्राप्त होने के बाद योग्यता पुण्य की इतनी होती है कि सभी श्रोता 20000 सीढ़ी पलक झपकते चढ़ जाते हैं भावों और परिणाम में विशालता आने पर विशाल कार्य भी सहजता से पूर्ण हो जाते हैं गुरु आदेश गुरु भक्ति से विधि नायक श्री पार्श्व नाथ भगवान की प्रतिमा के लिए दातार का दान अनुकरणीय है

पंचकल्याणक का आज प्रथम दिवस है संसार को असार जान कर संयम दीक्षा धारण कर सारे संसार को अपनी दिव्य देशना से सुख प्राप्त करने का मार्ग दिखाते है। धर्म को श्रद्धा भक्ति से धारण कर जीवन में उन्नति को प्राप्त करे। 
पाषाण और धातु की प्रतिमा को पंच कल्याणक में मंत्रोचार से प्रतिष्ठित कर आराध्य बनाया जाएगा ।हमें भी भगवान और गणधर स्वामी के द्वारा बताए गए मार्ग से यह अवसर मिले कि हम भी आप अरिहंत भगवान की भांति पापों कर्मों का प्रक्षालन कर सके जिस प्रकार भगवान ने कर्मों का नाश कर सिद्धालय में केवल ज्ञान प्राप्त कर विराजित हुए हैं भगवान के गुण की पूजा भजन और स्तुति की जाती है। आपको यह भावना करना चाहिए कि जैसे आपके कल्याणक हुए हैं वैसा मेरा भी कल्याण हो जाए। इसके लिए आपको अपनी शक्ति और सामर्थ को प्रकट कर पुरुषार्थ कर रत्न त्रय धर्म प्राप्त कर मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए पंच कल्याणक कमेटी अध्यक्ष बाबूलाल सरिया ने स्वागत भाषण दिया।सभी अतिथियों का शाल श्रीफल माला पगड़ी प्रतीक चिन्ह से स्वागत किया। दिगंबर दशा हुमड जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी, उपाध्यक्ष सूरजमल कड़वावत ,कोषाध्यक्ष महावीर मेदावत तथा श्री पार्श्वनाथ समवशरण जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव समिति के अध्यक्ष बाबूलाल सरिया,संपत्ति लाल सेठ ,प्रकाश चंद पचौरी उपाध्यक्ष एवं ऋषभ कुमार पचौरी कोषाध्यक्ष ने बताया कि इसके पूर्व प्रातः श्री जिन मंदिर में नांदी विधान की पूजन सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्र परिवार द्वारा की गई। इसके बाद एक वेशभूषा में महिलाओं का अनुशासित दल सिर पर शताधिक मंगल कलश लेकर चल रहा था। विशाल जलूस मार्ग पर सभी धर्मो के नागरिकों ने स्वागत द्वार लगाए। रांगोली बनाई गई ।जगह जगह पुष्प वृष्टि की जा रही थी कलश यात्रा के पीछे पंच कल्याणक में पात्र माता पिता,सोधर्म इंद्र,चक्रवती राजा,कुबेर, ईशान, सानत, आदि हाथी तथा बग्गी में सवार होकर चल रहे थे। जुलूस में 5 अश्व , 3 गज, 4 बैंड , शामिल रहे।जुलूस का समापन वर्धमान सभागार में हुआ ।पंडित हंसमुख जी के मंत्रोचार के बाद जंयती लाल डागरिया धवजारोहण किया गया। मंडप का उद्घाटन मणिलाल वगेरिया परिवार द्वारा किया गया । मुख्य कलश स्थापना दमयंती मानमल वगेरिया परिवार द्वारा किया गया। मुख्य कार्यक्रम स्थल वर्धमान सभागार में आचार्य श्री संघ सहित विराजित हुए। भगवान एवम् प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण एवम् दीप प्रवज्जलन सुलोचना देवी वगेरिया परिवार द्वारा किया गया। महिला मंडल द्वारा मनमोहक नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत किया। द्वारा सुंदर भजन का गायन किया दोपहर को सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, तथा जिनाभिषेषक किया गया। सभी इंद्र परिवार द्वारा याग मंडल की पूजन की गई। शाम को आरती तथा शास्त्र सभा हुई। 
गर्भ में अवतरित होने पर 14 करोड़ रत्नों की प्रतिदिन वृष्टि

गर्भ कल्याणक के अंतर्गत जो तीर्थंकर माता के गर्भ में आने वाले होते हैं उनके गर्भ में आने के 6 माह पूर्व से ही जन्म नगरीमें दिन में 4 बार 3:30 करोड़ कुल 14 करोड़ प्रतिदिन रत्नों की वर्षा देवों द्वारा की जाती है। तीर्थंकर माता 16 सपने देखते हैं इन 16 सपने में एरावत हाथी, महा वृषभ सिंह, अभिषेक होती लक्ष्मी, दो मालाएं, चंद्रमा सूर्य, युगल मछली, सुगंधित जल भरे हुए कलश, जल से भरा सरोवर, लहरों वाला महासागर, सिंहासन, देव विमान, नागेंद्र भवन रत्न रश्मि, तथा निर्भूम अग्नि इस प्रकार सोलह सपने तीर्थंकर की माता को सपने में दिखाई देते हैं । इन सपनों का नाटकीय मंचन किया गया। राजेशएल पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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