लोक निर्माण विभाग में प्रशंसनीय सेवाओं के बाद इंजीनियर अरविंद कुमार जैन हुए सेवानिवृत्त
बूंदी/
इंजीनियर अरविंद कुमार जैन 38 वर्ष तक प्रशंसनीय सेवाएं देने के बाद प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें विभाग द्वारा शॉल ओढ़ाकर सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
जैन का सर्वप्रथम चयन 28 दिसम्बर 1985 को एचबीटीआई कानपुर में प्रवक्ता (सिविल इंजीनियरिंग) के पद पर हुआ। सन् 1989 में जैन का भारतीय इंजीनियरिंग सेवा एवं तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग दोनों में हुआ किंतु अपने प्रदेश की सेवा को प्रमुखता से लेते हुए 1 फरवरी 1990 को विभागीय निर्माण इकाई इटावा में सहायक अभियंता के पद पर 8 वर्ष तक जनपद के विभिन्न खण्डों में डाकू ग्रस्त बीहड़ क्षेत्रों के पूरे समर्पण भाव से सेवा में लगे रहे जिसकी प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रशंसा की।
जैन की प्रशंसनीय सेवाओं को देखते हुए 4 मार्च 2010 को पदोन्नत किया गया। 
आपने अपने कार्यों में गुणवत्ता एवं नियमों से समझौता नहीं किया। विलुप्त हो चुकी ससुर खदेरी नदी एवं इसके उद्गम स्थल ठिठोरा झील को पुर्नजीवित करने के असाधारण कार्य के चलते वर्ष 2015 में लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार प्रदान किया गया। आपके द्वारा दिल्ली में आयोजित मिनीमम गर्वमेंट मेग्जीमम गर्वननेंस गर्वनमेंट ऑफ इंडिया कार्यशाला में भी व्याख्यान दिया। आपको उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चुनौतीपूूर्ण कार्य दिए गए। जिसको आपने अपनी कार्यकुशलता से संपन्न कराए।

जैन की प्रशंसनीय सेवाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 जून 2023 को प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग के सर्वोच्च पद पर पदोन्नत किया 31 जनवरी इस पद से सेवानिवृत्त हुए। इस पद से सेवानिवृत्त पर भारतवर्ष के दिगम्बर जैन समाज में गौरव की बात है। 
एक परिचय। 
इनका जन्म 2 जनवरी 1964 को झांसी के ग्राम घुरैया में स्व. भागचंद जैन एवं माता रामकली जैन के एक धार्मिक अनुशासित व प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। बाल्यकाल से ही बहुमुखी प्रतिभा एवं मृदुल व्यक्त्वि के धनी होने से गुरुओं व परिवार के प्रिय रहे।
प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के उपरांत सन् 1984 में कानपुर हरकोर्ट बटलर टेक्नोलोजिकल इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने जैन समाज के धार्मिक स्थलों के विकास के अथक प्रयास किए। जैन तीर्थ स्थलों को सड़कों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। आप अभी भी जैन समाज के भित्ती चित्रों का अध्ययन करते हैं और उनके संरक्षण के लिए प्रयास करते हैं। 
रविन्द्र कालाजैन गजट संवाददाता, बून्दी से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
