चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव संपूर्ण देश में मनाया जाएगा । वर्षभर में होगे  विविध आयोजनआ. वर्धमानसागरजी महाराज के सान्निध्य में देशभर के श्रावक श्रेष्ठीयों की हुई राष्ट्रीय अधिवेशन

धर्म

चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव संपूर्ण देश में मनाया जाएगा । वर्षभर में होगे  विविध आयोजनआ. वर्धमानसागरजी महाराज के सान्निध्य में देशभर के श्रावक श्रेष्ठीयों की हुई राष्ट्रीय अधिवेशन ऋषभदेव -बीसवीं सदी में दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती 108 आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठान का 100 वां वर्ष 2024 में, आरंभ होगा । आचार्य पद प्रतिष्ठापन के 100वें वर्ष को आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव के रूप में 2024-25 में भव्य विशाल स्तर पर वैचारिक आयामों के साथ संस्कृति संवर्धन, सामाजिक सरोकार के बहुउद्देशीय पंचसूत्री कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा।
महोत्सव के आयोजन के लिए विस्तृत रूपरेखा व कमेटी गठन के लिए परम्परा के पट्टाधीश राष्ट्रगौरव, वात्सल्यवारिधि आचार्य 108 श्री वर्धमानसागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में देश के समस्त श्रावक श्रेष्टीयों की राष्ट्रीय सभा ऋषभ देव में संपन्न हुई।

धर्म सभा में आचार्य श्री ने संबोधित करके कहा कि महामना आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद का शताब्दी महोत्सव मना कर उनके चरणों में कृतज्ञता विन्यांजलि ,भावांजलि अर्पित करने का एक अवसर समाज को मिला है। आचार्य श्री ने पीड़ा पूर्वक समाज की उदासीनता देखकर यह लगता है कि समाज आचार्य श्री के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करने के प्रति उदासीन है आचार्य श्री ने बताया कि सम्यक दर्शन के तीन अंगों में स्थितिकरण वात्सल्य भाव, और प्रभावना अंग है हमें जैन धर्म की प्रभावना के साथ मानवता के नाते समाज की मदद करना चाहिए ।समाज को जागृत होने की जरूरत है। ब्रह्मचारी गजू भैय्या, राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि आज देश भर में पंचकल्याणक बहुत संख्या में हो रहे हैं पंचकल्याणक से होने वाली बचत से दिगंबर जैन तीर्थ के मंदिरों के जिर्णोद्धार की बहुत जरूरत है अगर हर नगर एक पांच कल्याणक कमेटी 5 से 10 मंदिरों का भी जिर्णोद्धार करते हैं तो यह आचार्य श्री के प्रति बहुत बड़ी विनयांजलि होगी क्योंकि आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने मंदिर में विजातीय प्रवेश के विरोध में 1105 दिन तक अन्न आहार का त्याग किया था उन्होंने इस दौरान केवल दूध और पानी ही लिया, क्योंकि फल और सब्जी अनाज नहीं ले रहे थे मंदिरों के नवीनीकरण जिणौंघार से आचार्य श्री का त्याग सार्थकता को प्राप्त होगा। विशाल राष्ट्रीय सभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री वर्धमानसागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री ने सन 1934 का चातुर्मास आयड उदयपुर में किया था।उन्हीं के संस्कार उनकी संस्कृति रक्षण की भावना के संस्कार संपूर्ण देश में व्याप्त होकर जैनत्व व श्रमण दिगम्बरत्व को जीवित रखे हुए हैं । संस्कृति को जीवित रखने में संस्कारों का बड़ा महत्व है, आज आज हम सब आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के संस्कार उपकारों से प्रभावित है । उनका गुणगान करने उनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव संस्कृति संरक्षण व सामाजिक सरोकार का माध्यम बनेगा । आपने हर नगर घर देश में श्री शांति सागर जी का सूत्र दिया। वही मुनिश्री हितेन्द्र सागरजी महाराज ने आचार्यश्री के जीवन परिचय से अवगत कराते हुए कहा कि वे दक्षिण भारत से निकले ऐसे सूर्य थे जिन्होंने मिथ्यात्व की अवधारणा से मुक्ति दिलाने का कार्य किया । गर्व से कहेंगे की हम जैन है यह सूत्र हमें आचार्य शांतिसागरजी ने दिया । चित्र अनावरण व आचार्यश्री वर्धमानसागरजी का पाद प्रक्षालन

जिनवाणी भेंट अतिथियों ने की।   
आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव की प्रस्तावना रखते हुए अनेक वक्ताओं ने कहा कि दुनिया को सल्लेखना का जीवन पाठ पढ़ाने वाले आचार्य शांतिसागरजी का उपकार हम भूल नहीं सकते। शताब्दी वर्ष में पंच सूत्री कार्यक्रम में आचार्य शांतिसागरजी महाराज का जीवन चरित्र जन-जन तक पहुंचाना, उनकी कीर्ति स्थापना हेतु कीर्ति फलक स्तूप निर्माण, सेवा संकूल के रूप में पाठशालाओं का निर्माण व उन्नयन, व्यायामशालाओं का निर्माण, राष्ट्रीय जनगणना में जैन लिखवाने की अनिवार्यता हेतु जागरुकता कार्यक्रम ,स्वावलंबन योजना के माध्यम से आर्थिक विपन्न समाजजनों का स्वरोजगार आदि प्रकल्पों हेतु सहायता देना । उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाओं को दूर करना आदि अनेको आयोजन होंगे। यह वर्ष 2024 से 2025 के बीच बृहद स्तर पर मनाया जाएगा | संचालन श्री राकेश सेठी कोलकाता ने करते हुए महोत्सव को विश्वव्यापी बनाने की बात कही। आचार्य शांतिसागरजी के नाम पर कोई मतभेद नहीं है, सभी जुड़ेंगे और हम सफल होंगे । समडोली में आचार्य पद मिला था । आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी में सबको संगठित होना चाहिए। राष्ट्रीय सभा में अनिलसेठी बंगलुरु,गजराज गंगवाल दिल्ली,प्रकाश बड़जात्या चेन्नई,राकेश सेठी, कोलकाता,सुरेश सबलावत, जयपुर
राजेश शाह उदयपुर,अशोकगोधा,उदयपुर के के जैन उदयपुर, सहित देश के अनेक राज्यों नगरों गुवाहाटी, कोलकाता, दिल्ली, किशनगढ़, इचलकरंजी, बेलगाम, समडोली, सलुम्बर, घरियाबाद, चैन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, सनावद राजस्थान आदि अनेक प्रदेशों से गुरु भक्तों ने सहभागिता की । सभी ने उत्साह पूर्वक शताब्दी महोत्सव को मनाने का संकल्प लिया। इस दौरान स्थानीय भट्टारक यशकिर्ति गुरुकुल ट्रस्ट के महामन्त्री सुन्दरलाल भाणावत, समाज के सेठ राजमल कोठारी, पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कमेटी के  महामन्त्री प्रकाश जे भाणावत, समाज के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन, तीर्थ रक्षा कमेटी के अध्यक्ष रमेश चन्द्र मेहता, सहित समाज जन मौजूद थे। राजेश पंचोलिया से प्राप्त जानकारी के साथ संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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