माँ का दिन मेरी माँ को समर्पित

माँ का दिन मेरी माँ को समर्पित तेरी ऊँगली पकड़ कर चला ममता के आँचल मे पला माँ मेरी माँ माँ तेरा लाडला बन के तेरा साया मै तुझको ठाम लू उठके रब से पहले मै तेरा नाम लू माँ औ मेरी माँ रखु तुझे पलके तले पूजा करू तेरी तेरे सिवा बता क्या ज़िन्दगी […]

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महावीर जयंती विशेष काव्य रचना

सुबह पुकारूँ शाम पुकारूँ,श्री वीरा।* *दो अक्षर का नाम पुकारूँ, श्री वीरा।। *सब कष्टों की एक दवाई है इसमें।।* त्रिशला नंदन वीर पुकारूँ महावीरा ।।* *मेरे मन में हैं मुस्काते प्रभु वीरा *हर संकट को दूर भगाते,महावीरा ।।* *याद करूँ जब भी दिल से अतिवीरा को ।* *जीवन में शुभ मार्ग दिखाते महावीरा , ।।* […]

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नेत्रदान पर काव्य रचना आओ हम किसी को रोशनी दे जाए,

आओ हम किसी को रोशनी दे जाए, किसी की जिंदगी में खुशियों के रंग भर जाएं एक दिन सभी को इस दुनिया से जाना है और उस दिन सबकुछ राख हो जाना है तो क्यूं न राख होने से पहले किसी जरूरतमंद के हम काम आ जाए आओ हम किसी की …… दुनिया बहुत खूबसूरत […]

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सुधासागर महाराज के चरणो काव्य रचना कवि सौरभ भयंकर चंदेरी द्वारा

सुधासागर महाराज के चरणो काव्य रचना कवि सौरभ भयंकर चंदेरी द्वारा जिनकी दहाड़ सिंह सरीखी, कड़वा सच जो कहते हैं मगर गुरु की शरण मिले तो बालक बनकर रहते हैं विद्या गुरु के सुधा सिंधु के हम सब गुण को गाते हैं जो गुरुवर को ध्याते हैं वह गुरुवर के हो जाते है। कवि सौरभ […]

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राजेंद्र जैन की कलम से गुरु वंदन काव्य रचना

कुंडलपुर पंचकल्याण महामहोत्सवके पावन अवसर पर प्रस्तुत है हमारी यह रचना सादर—- इस युग के महावीर आचार्य भगवन विद्यासागर महा मुनिराज ससंघ का (१३० मुनिराज)दि.28.11.18 को नव दीक्षित मुनिराजो सहित परिचय हमने अपनी इस रचना मे पिरोने का प्रयास किया है सादर प्रस्तुत है…… गुरु वंदन हमारी पुस्तक आद्याक्षरांजलि से दोहा गुरु चरणों विन रे […]

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कुडलपुर की महिमा राजेन्द्र जैन अनेकान्त की कलम से

कुडलपुर की महिमा राजेन्द्र जैन अनेकान्त की कलम से परम पावन श्री सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जी की महिमा कौन नही जानता छोटे बाबा संत शिरोमणि आचार्य भगवन विद्यासागर जी महामुनिराज की महती अनुकंपा से बड़े बाबा के विशाल भव्याति भव्य जिनालय के पंचकल्याणक के महामहोत्सव के मंगल अवसर पर भाव भरी विधा मे देखिए कुछ […]

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विकर्ष जैन की कलम से

बुरे समय में भी सबको धीरज को धरना होता है। ईसीजी में सीधी लाइन का मतलब मरना होता है। मंजिल जितनी सुंदर होती उतना चढ़ना होता है। अपने जीवन के खुद जौहरी है मूरत खुद गढ़ना होता है। कवि ह्र्दय पंडित विकर्ष शास्त्री “गुणायतन”

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मेष राशि का वर्चस्व

दो ही है मेष राशि एक ने कलम और साहित्य में मारी बाजी दूसरे ने सेवा और राजनीति में मारी बाजी है दोनो ही मेष राशि इनकी खूबी इनके नाम से जानी जाती एक अखिलेश और एक अभिषेक क्या खूब है मेष राशि आप दोनो ने रामगंजमडी की शान बढ़ा दी । बधाई तो दोनों […]

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माता पिता

????????माता पिता ???????? धरती के हर इक प्राणी ने , *मां से ही जीवन* पाया है और पिता ने खुशियां देकर, अपना प्यार लुटाया है कदम कदम पर हमें संभलना, मात -पिता सिखलाते हैं और कठिन राहों में हमको हिम्मत वही दिलाते हैं पल-पल अपना जीवन अर्पण करके जो कुछ भी पाया है वो स्वप्न […]

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