कुडलपुर की महिमा राजेन्द्र जैन अनेकान्त की कलम से

काव्य रचना

कुडलपुर की महिमा राजेन्द्र जैन अनेकान्त की कलम से
परम पावन श्री सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जी की महिमा कौन नही जानता छोटे बाबा संत शिरोमणि आचार्य भगवन विद्यासागर जी महामुनिराज की महती अनुकंपा से बड़े बाबा के विशाल भव्याति भव्य जिनालय के पंचकल्याणक के महामहोत्सव के मंगल अवसर पर भाव भरी विधा मे देखिए कुछ इस तरह सादर —–

कुंडलपुर-महिमा

दोहा- एकादश

कुंडलपुर गिरिराज की,महिमा अपरंपार।
कुंडलपुर जिन धाम मे,तभी बसा संसार।।

कुंडलपुर शिवधाम मे,ठहरे गुरु भगवंत।
कुंडलपुर मे तभी तो,जीवन आज बसंत।।

कुंडलपुर मे विराजित,आदि नाथ भगवान।
कुंडलपुर तब ही सखे,तीनों लोक महान।।

कुंडलपुर जिन प्रतिष्ठा,महां महोत्सव आज।
कुंडलपुर की ओर चला,पूरा जैन समाज। ।

कुंडलपुर अतिशय महां,रोग शोक सब दूर।
कुंडलपुर नित पूजिए,मुक्ति जहाँ अदूर।।

कुंडलपुर  निर्ग्रन्थ भूमि,रज कण हुआ पवित्र।
कुंडलपुर श्रावक चले, करने श्रेष्ठ चरित्र।।

कुंडलपुर चलियो सखी,आज विरागी भाव।
कुंडलपुर आचार्य श्री,जिन चरणों की छांव।।

कुंडलपुर सुर नर सभी, पूजन करें यथेष्ठ ।
कुंडलपुर तब ही लगे, स्वर्गों से भी श्रेष्ठ ।।

कुंडलपुर* तप साधना, जीवन करे पवित्र ।
कुंडलपुर मे पहुँच कर,दुनिया लगती मित्र।।

कुंडलपुर आराधना, मन को करती शांत।
कुंडलगिरि पर ध्यान से, मुद्रा बने प्रशांत।।

कुंडलपुर* गिरिराज से, श्रीधर जी भगवान।
कुंडलपुर से ही मिले,’अनेकांत’शिवधाम।।

राजेन्द्र जैन ‘अनेकांत’
बालाघाट दि 17-02-202

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