विकर्ष जैन की कलम से

काव्य रचना

बुरे समय में भी सबको धीरज
को धरना होता है।
ईसीजी में सीधी लाइन
का मतलब मरना होता है।
मंजिल जितनी सुंदर होती उतना चढ़ना होता है।
अपने जीवन के खुद जौहरी है मूरत खुद गढ़ना होता है।
कवि ह्र्दय पंडित विकर्ष शास्त्री “गुणायतन”

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