1890 की तस्वीर में कैद सांगानेर जैन मंदिर की गौरवशाली विरासत, मुनि सुधासागर महाराज की प्रेरणा से हुआ ऐतिहासिक जिनालय का जीर्णोद्धार
जयपुर। राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में सांगानेर स्थित श्री ऋषभदेव दिगंबर जैन जिनालय का विशेष स्थान है। इस प्राचीन जिनालय की करीब 1890 की बताई जा रही एक दुर्लभ तस्वीर सामने आई है, जो जैन धर्म की समृद्ध स्थापत्य कला, प्राचीन शिल्पकला और श्रद्धा की गौरवशाली परंपरा की झलक प्रस्तुत करती है।

तस्वीर में मंदिर का मुख्य वेदी परिसर दिखाई दे रहा है। इसकी बारीक नक्काशी, कलात्मक स्तंभ, आकर्षक तोरण और प्राचीन निर्माण शैली उस दौर के शिल्पकारों की अद्भुत कला का परिचय देते हैं।
मुनिश्री सुधासागर महाराज की प्रेरणा से हुआ जीर्णोद्धार
समय के साथ प्राचीन धार्मिक धरोहरों का संरक्षण और उनका पुनरुद्धार अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। सांगानेर के इस प्राचीन ऋषभदेव दिगंबर जैन जिनालय का जीर्णोद्धार मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा से हुआ। यह कार्य केवल मंदिर के स्वरूप को संवारने का प्रयास नहीं, बल्कि जैन धर्म की प्राचीन धरोहर, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इतिहास को संजोने की जरूरत
करीब 136 वर्ष पुरानी बताई जा रही यह तस्वीर अपने आप में एक अनमोल ऐतिहासिक दस्तावेज है। यह हमें उस दौर के मंदिर स्थापत्य और जैन समाज की धार्मिक परंपराओं से परिचित कराती है।ऐसी ऐतिहासिक तस्वीरें केवल अतीत की यादें नहीं होतीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक विरासत की अमूल्य धरोहर होती हैं। सांगानेर का यह प्राचीन जिनालय आज भी जैन समाज की श्रद्धा, आस्था और गौरव का प्रतीक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






