धर्मतीर्थ में जगतगुरू बने धर्म चिन्तामणि

धर्म

धर्मतीर्थ में जगतगुरू बने धर्म चिन्तामणि

धर्मतीर्थ धर्मतीर्थ क्षेत्र में प्रथम बार जगतगुरू गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्थुसागरजी गुरुदेव का भव्य आगमन हुआ।जहाँ पर उनके प्रिय शिष्य क्रांतिकारी राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी ससंघ ने उनका भव्यातिभव्य स्वागत किया।दोपहर में पूज्य जगत्गुरु के सान्निध्य में रविपुष्यामृत योग में आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी की प्रेरणा से सिद्ध शिलान्यास महोत्सव में जगत्गुरु आचार्य श्री के करकमलों से मुख्य आधार शिला की स्थापना की गई।

 

 

धर्मसभा में आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव ने कहा कि जगतगुरु देव ने इस युग को श्रमण परम्परा की पाँच पीढियां प्रदान की हैं।सैकड़ों मुनिदीक्षायें दी है और 52से अधिक आचार्य पद,25गणिनी आर्यिकायें बनाई हैं।लाखों करोड़ों लोगों को निर्व्यसनी बनाकर उन्हें धर्म के मार्ग पर लगाया है।जगतगुरु देव सबकी इच्छा पूरी करने वाले कल्पवृक्ष हैं।कामना पूरी करने वाले कामधेनु से बढ़कर हैं।ऐसे आचार्य श्री को धर्मतीर्थ परिवारकी और से धर्मचिन्तामणि नाम आराधना करके अपना पुण्य कोष भरते हैं।

 

 

 

 इससे पूर्व जगतगुरु आचार्य श्री का पादप्रक्षालन श्री नितिन सौ.वैशाली यश श्रद्धा नखाते परिवार नागपुर ने धर्मतीर्थ विकास समिति के साथ गुरू परिवार नागपुर को लेकर किया।पीछी भेंट श्री प्रवीण सौ.विद्या, लोकेश देवेश चतुर परिवार मुंबई ने करके जगतगुरू की पीछी प्राप्त की।कमंडलु भेंट आयुष जैन परिवार रोहतक ने किया।श्रीमती मिलन अमित सुमित निकुंज जैन परिवार बाराबंकी हैदराबाद ने माला व ग्रंथ भेंट किया।वहीं शास्त्र भेंट श्री मदनलाल साहिल पाटणी परिवार छ.संभाजीनगर ने किया।धर्मतीर्थ ट्रस्ट, विकास समिति द्वारा सम्मान पत्र समर्पित किया गया।

 

धाम तीर्थ चिंतामणि की उपाधि से सुशोभित करते हुए उपाधि पत्र में कहा गया 

धर्म चिन्तामणि “

हमारे दीक्षा शिक्षा प्रदाता गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्धुसागरजी महागुरुदेवपरम पूज्य जगद्गुरु, गुरुणां गुरु, 500 से अधिक शिष्य-प्रशिष्यों के दीक्षा- शिक्षा- संस्कार- प्रेरणा प्रदाता, मंत्रविद्या चक्रवर्ती भारत गौरव, आचार्य

शिरोमणि, जिनके शिष्य- प्रशिष्यों की 5 पीढी हो गयी है ऐसे आचार्य प्रपितामह, वात्सल्य रत्नाकर ज्येष्ठ श्रेष्ठ, सर्वश्रेष्ठ जगतप्रसिद्ध जगतगुरु गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्थुसागरजी महागुरुदेव के पुनीत पाद युगल में, सिद्ध-श्रुत- आचार्य भक्ति पूर्वक बारम्बार नमोऽस्तु..! नमोऽस्तु..! नमोऽस्तु..!

 

 

है भगवन्!आप इस सदी के दीर्घ दीक्षित, ज्येष्ठ, सर्वश्रेष्ठ आचार्य महानायक हैं। आचार्यों के आचार्य हैं । 500 से अधिक आचार्य, उपाध्याय, मुनि, गणिनी आर्यिकाऐलक, क्षुल्लक, क्षुल्लिका संघ के दीक्षा शिक्षा संस्कार- प्रेरणा प्रदाता हैं।

 

 

 

है आचार्य प्रपितामह!इस युग में एक मात्र आप ही ऐसे आचार्य हैं जिसने दिगम्बर जैन श्रमण परम्परा की पांच पीढ़ी विश्व को प्रदान की है। इस युग में चल तीर्थों का निर्माण किया है।

 

 

है युगनायक !

आपने अनेकों अचल तीर्थों का भी नवकोटि से निर्माण किया है व कराया है। अणिन्दा, रानीला आदि अनेक तीर्थों का जीर्णोध्दार किया है। वहीं सम्मेदाचल कुन्थुगिरी महाक्षेत्र का नवनिर्माण आपकी प्रेरणा एवं सान्निध्य में सम्पन्न हुआ है। इसके अलावा आपने अनेकों महाग्रन्थों की रचना करके माता जिनवाणी की समृद्धि की है।

 

 

 

है युगप्रमुख 

आपने लाखों करोड़ों युवाओं, आम जन मानस को, निर्व्यसनी बना कर, अपने मंत्रात्मक आशीर्वाद से उनका उध्दार किया है।.आप आर्ष परम्परा के दृढस्तंभ हैं। साधना के सुमेरु हैं। प्राणीमात्रकी चिन्ता मिटाने वाले चिंतामणि रत्न हैं। सबकी कामना पूर्ण करने वाले कामधेनु हैं। सबकी

कल्पना वांछा पूरी करने वाले कल्पवृक्ष हैं। आप वाक् सिद्धि के धनी धरती के देवता चलते फिरते भगवान हैं। क्योंकि आपके ही आशीर्वाद से HND पुणे अतिशय क्षेत्र

बचा है व बना है। आपके आशीर्वाद से ही आपके प्रिय शिष्य क्रांतिकारी राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी के सान्निध्य में धर्मतीर्थ क्षेत्र का नवनिर्माण व विकास हो रहा है।

 

 

 

आज रविवार 4-जनवरी 2026 को रविपुष्यामृत योग में सिद्ध शिलान्यास महोत्सव में धर्मतीर्थ अतिशय क्षेत्र में आपके सिद्धि प्रदाता प्रथम आगमन पर क्रांतिकारी

राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदी की प्रेरणा से सकल जैन समाज, उपस्थित अपार जन समूह, व धर्मतीर्थ परिवार आपको संस्कृति संग संस्कारश्री धर्मतीर्थधर्म चिन्तामणि’

गौरव पदवी से आपकी आराधना करके स्वयं का पुण्य कोष भरते हैं। आप सदैव स्वस्थ, दीर्घायूँ चिरायु हों..!

धर्मतीर्थ क्षेत्र में आपका ससंघ मंगल आगमन हम सबके लिए सदैव आनंद वर्धक मंगलकारी हो इसी भावना के साथ…आपके चरणों में नतमस्तक…!धर्मराजश्री तपोभूमी दिगंबर जैन ट्रस्ट, धर्मतीर्थ विकास समिती

            संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *