आचार्य विद्यासागर महाराज की जन्म जयंती से पूर्व वृद्धाश्रम में सेवा की मिसाल, बुजुर्गों को बांटे फल एवं वस्त्र

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आचार्य विद्यासागर महाराज की जन्म जयंती से पूर्व वृद्धाश्रम में सेवा की मिसाल, बुजुर्गों को बांटे फल एवं वस्त्र

 

बुजुर्गों के बीच पहुंचकर महिला परिषद की बहनों ने जाना उनका हाल-चाल, आत्मीयता से किया संवाद — मानव सेवा को बताया सच्ची विनयांजलि

 

सागर।

विश्व वंदनीय संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की जन्म जयंती (शरद पूर्णिमा) के पावन अवसर से पूर्व अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला परिषद की मुख्य शाखा द्वारा सेवा और संवेदना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया। परिषद की पदाधिकारियों एवं सदस्य बहनों ने वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां निवासरत बुजुर्गों को फल एवं वस्त्र वितरित किए तथा उनके साथ आत्मीय संवाद कर उनका हाल-चाल जाना।

 

इस दौरान महिला परिषद की बहनों ने बुजुर्गों के जीवन की परिस्थितियों को समझने, उनके दुख-दर्द को सुनने और उनकी भावनाओं को जानने का प्रयास किया। साथ ही भविष्य में भी आवश्यकतानुसार सहयोग करने का भरोसा दिलाया। जब बुजुर्गों ने परिषद की बहनों को अपने बीच आत्मीयता से बातचीत करते देखा, तो कई आंखें भावुक हो उठीं। उन्हें ऐसा महसूस हुआ, मानो कोई अपना उनका हाल जानने आया हो। यह दृश्य मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की आत्मीयता को सजीव रूप में प्रस्तुत कर गया।

 

सेवा के माध्यम से आचार्य श्री को विनयांजलि

 

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन आत्मकल्याण के साथ-साथ परकल्याण, करुणा, त्याग और मानव सेवा की प्रेरणा देता रहा है। उनकी प्रेरणाओं से समाज में अनेक सेवा प्रकल्प संचालित हुए, जो आज भी जनकल्याण की दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं।

 

परस्परोपग्रहो जीवानाम्”अर्थात जीव एक-दूसरे के उपकार के लिए हैं, का संदेश इस सेवा गतिविधि में सार्थक रूप से परिलक्षित हुआ। मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना है, इस भावना के साथ किया गया यह आयोजन आचार्य श्री के प्रति श्रद्धा, विनय और कृतज्ञता की सुंदर अभिव्यक्ति बना। जरूरतमंदों की सेवा और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का यह प्रयास आचार्य श्री के आदर्शों को आत्मसात करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

अतिथियों ने साझा किए विचार

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय पदाधिकारी श्रीमती शकुंतला जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रेरणादायी जीवन एवं उनके विचारों पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

एडवोकेट रश्मि जैन ने कहा कि हमारे बुजुर्ग अनुभवों की अमूल्य धरोहर होते हैं। उनका सम्मान करना और उनकी जरूरतों के समय साथ खड़े रहना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने आश्वस्त किया कि परिषद की बहनें बुजुर्गों एवं जरूरतमंदों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेंगी।

 

संभागीय अध्यक्ष अंजू सेठ ने कहा कि महिला परिषद की शाखाएं जरूरतमंदों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। ऐसे सेवा कार्य समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर शोभना जैन टाइल्स ने कहा बुजुर्गों से हमें आशीर्वाद और प्रेरणा मिलती है।

 

पदाधिकारियों एवं सदस्यों की रही सहभागिता

 

कार्यक्रम के समापन पर शाखा अध्यक्ष श्रीमती मीनल लंबरदार ने उपस्थित पदाधिकारियों, अतिथियों एवं सभी सदस्य बहनों का आभार व्यक्त किया। पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. आशा गोदरे एवं नूतन नाहर ने इस सेवा आयोजन की सराहना की। श्रीमती निधि सुनील जैन इस आयोजन की प्रेरणास्रोत रहीं।

 

इस अवसर पर प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती मंजू मगन, विशिष्ट अधिकारी श्रीमती सुगंधी जैन, श्रीमती दीप्ति चंदेरिया, सचिव रूबी जैन, कोषाध्यक्ष मंजू सिंघई सहित श्रीमती कांता जैन, रेखा बहेरिया, भावना जैन, नीमा जैन, नीलम जैन, अलका जैन एवं अन्य सदस्य बहनें उपस्थित रहीं।

 

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की जन्म जयंती से पूर्व आयोजित यह सेवा गतिविधि इस संदेश के साथ प्रेरणादायी रही कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और परोपकार के कार्यों से व्यक्त होती है।

 

रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।

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