अंधकार बंधन का प्रतीक है और प्रकाश मुक्ति का प्रतीक है आचार्य श्री समय सागर महाराज
खजुराहो
आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज ने स्वर्णोदय तीर्थ पर अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि प्रकाश के बगैर पदार्थ का बोध नहीं होता है। अंधकार बंधन का प्रतीक है, और प्रकाश मुक्ति का प्रतीक है। संसार में बंधन के भी कारण है, और मुक्ति के भी कारण है। बंधन के कारणआर्तध्यान और रौद्र ध्यान है। जबकि मुक्ति के कारण धर्म ध्यान और शुक्ल ध्यान है।
आचार्य श्री ने इष्ट वियोग, अनिष्ट योग के संयोग को बंधन का कारण समझाया जन्म मरण के ऊपर उठने के लिए मोक्ष मार्ग बताया। मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए साहस बांधना चाहिए यही वस्तु का स्वरूप है। साधना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वस्तु परिवर्तनशील है। इसे रोका नहीं जा सकता,चाहकर भी कुछ समय और जीना चाहें किंतु रुक नहीं पाएंगे। जाना ही पड़ेगा। सब कुछ छोड़ना पड़ेगा कोई भी साथ जाने वाला नहीं है।



महाराज श्री ने कहा कि स्वार्थवश कोई कार्य ना करें, स्वस्थ रहने का उपाय करें। आचार्य गुरुवर ने अकाल मरण,और सकाल मरण की भी बात की। महाराज श्री ने प्रवचन के अंत में कहा कि व्यापार करना चाहिए यही अर्थ पुरुषार्थ है। चाहे जैसे भी धन कमा लेना अर्थ पुरुषार्थ नहीं है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
